बाबरी मस्जिद, अश्लील पोस्ट... तल्हा अब्दुल रहमान की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- टिप्पणी करवाने की कोशिश मत करो

उच्चतम न्यायालय ने बाबरी मस्जिद पर सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि 'बाबरी मस्जिद एक दिन तुर्की की सोफिया मस्जिद की तरह फिर से बनाई जाएगी'।

बाबरी मस्जिद, अश्लील पोस्ट... तल्हा अब्दुल रहमान की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- टिप्पणी करवाने की कोशिश मत करो

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उस शख्स के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिस पर बाबरी मस्जिद को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप है। आरोपी ने अपनी पोस्ट में बाबरी मस्जिद को बनाए जाने को लेकर एक आपत्तिजनक पोस्ट लिखी थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की बेंच ने एडवोकेट तल्हा अब्दुल रहमान (याचिकाकर्ता की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद मामला रद्द करने से इनकार कर दिया। इस दौरान याची ने मामला वापस लेने की गुहार लगाई। कोर्ट ने मामला वापस लेने की इजाजत देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल की पोस्ट में कोई अश्लीलता नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक अन्य व्यक्ति ने उस पोस्ट पर अश्लील और भड़काऊ टिप्पणी की थी, जिसकी जांच नहीं की गई। जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की पोस्ट को देखा है और टिप्पणी करते हुए चेतावनी दी कि हमसे कोई टिप्पणी करवाने की कोशिश मत कीजिए। अदालत ने यह कहते हुए मामला निपटा दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सभी तर्कों पर ट्रायल कोर्ट अपने विवेक से विचार करेगा।

गौरतलब है कि 6 अगस्त 2020 को याचिकाकर्ता मंसूरी (जो अब कानून स्नातक हैं) के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने फेसबुक पर एक अपमानजनक पोस्ट की थी, जिस पर एक अन्य शख्स ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की।