जच्चा-बच्चा की मौत की होगी डेथ ऑडिट।
महराजगंज। जिला अस्पताल में कुछ घंटे के अंतराल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में डीएम अनुनय झा परतावल सीएचसी पर जांच-पड़ताल करने पहुंचे। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी व महिला चिकित्सक डॉ. शालिनी सिंह से पूछताछ की। इस दौरान सीएमओ डॉ. नीना वर्मा व एसीएमओ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भी मौजूद रहे। पूछताछ के बाद डीएम अनुनय झा ने बताया कि जच्चा-बच्चा की मौत के मामले की डेथ ऑडिट कराई जाएगी। डेथ ऑडिट में अगर किसी की भी लापरवाही सामने आएगी तो जीरो टॉलरेंस पर कार्रवाई तय है।
परतावल क्षेत्र के कोटवा गांव में रहने वाली रुबीना पत्नी टुनटुन चौथी बार मां बनी थी। दो बच्चों की पहले ही मौत हो चुकी है। केवल दो साल का एक बेटा है। परिवार बिहार का रहने वाला है, लेकिन रोजी-रोटी के लिए टुनटुन पत्नी समेत परतावल आ गया था और कोटवा में रहता है। परतावल के एक चाय की दुकान पर काम करता है। रविवार को दिन में करीब डेढ़ बजे वह प्रसव पीड़ा के बाद पत्नी को लेकर इलाज कराने परतावल सीएचसी पहुंचा था, कुछ देर बाद वह सीएचसी से पत्नी को लेकर परतावल के एक निजी अस्पताल गया। बाद में वहां से फिर सीएचसी पहुंचा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी ने बताया रात में साढ़े 11 बजे रूबीना को भर्ती किया गया था। उसके शरीर में खून की कमी थी पर पति सीएचसी में ही इलाज कराना चाहता था। बच्चे की धड़कन नहीं मिल रही थी। सुबह आशा कार्यकत्री को बुलाकर एंबुलेंस से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एपी भार्गव का कहना है कि सोमवार दिन में 11 बजे नार्मल डिलीवरी हुई, जिसमें मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ। प्लेसेंटा फंस गया था। शिशु का शव सड़ चुका था। इसकी के बाद लापरवाही की बात उठने लगी।

