ईरान ने अमेरिकी घमंड किया चकनाचूर, दुनिया में पहली बार F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को मारा, किसने दी 'तीसरी आंख'?
F-35 Stealth Fighter Jet: ईरान ने एफ-35 पर कौन सी मिसाइलें दागी थी लेकिन यह एक लोइटरिंग म्यूनिशन हो सकती है। खास तौर पर 358 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल या एक छोटी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
तेहरान: अमेरिका के सेन्ट्रल कमांड (CENTCOM) ने माना है कि ईरान में ऑपरेशन के दौरान उसके एक एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि सेन्ट्रल कमांड ने ये भी कहा है कि नुकसान होने के बावजूद ये फाइटर जेट वापस अपने बेस पर लौटने में कामयाब रहा और पायलट पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन एफ-35 पर हुए हमले के बाद साफ हो गया है कि अमेरिका और इजरायल, ईरान के वायुक्षेत्र को 20 दिनों के युद्ध के बाद भी पूरी तरह से कंट्रोल करने में नाकाम रहे हैं। एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट पर हमला अमेरिका के घमंड का चकनाचूर होना है।
IRGC ने कहा है कि मध्य ईरान के ऊपर एक सटीक हमले में अमेरिकी F-35 को 'गं भीर नुकसान' पहुंचाया गया है। IRGC ने कहा कि विमान को उसके हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा गुरुवार तड़के लगभग 2.50 बजे (भारतीय समय के हिसाब से करीब 6 बजे शाम में) निशाना बनाया गया। IRGC ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन '125 से ज्यादा US-इजरायली ड्रोनों को सफलतापूर्वक रोकने के बाद' किया गया और यह घटना "देश की एकीकृत हवाई रक्षा प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधारों को दर्शाती है।"
ईरान ने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को कैसे निशाना बनाया होगा?
अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट को निशाना बनाना एक दुर्लभ घटना है और दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना किसी 'तीसरे' देश की मदद के ईरान के लिए ऐसा करना अत्यंत मुश्किल है। वो तीसरा देश रूस हो सकता है क्योंकि कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रूस, ईरान को सैटेलाइट मदद दे रहा है। रूस के पास ही स्टील्थ जेट को ट्रैक करने की क्षमता और एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें भी हैं। हालांकि नवभारत टाइम्स के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।
एफ-35 एक स्टील्थ फाइटर जेट है और इसे रडार से बचने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। ईरान के पास कोई दुनिया का एडवांस रडार भी नहीं है तो फिर एफ-35 को कैसे निशाना बनाया गया? डिफेंस एक्सपर्ट संदीप उन्नीथन ने कहा कि तथाकथित स्टेल्थ टेक्नोलॉजी एक 'गलत नाम' है। उन्होंने इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा कि 'कंपनी के ब्रोशर भले ही दावा करें कि यह रडार के लिए पूरी तरह से अदृश्य है। लेकिन इसका पता लगाने के और भी तरीके हैं। उनमें से एक है गर्मी के जरिए। गुरुवार को ठीक यही हुआ।'
हालांकि यह पता नहीं है कि ईरान ने एफ-35 पर कौन सी मिसाइलें दागी थी लेकिन यह एक लोइटरिंग म्यूनिशन हो सकती है। खास तौर पर 358 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल या एक छोटी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
ईरान की 358 मिसाइल क्या है?
358 मिसाइल को SA-67 के नाम से भी जाना जाता है और यह एक तरह का लोइटरिंग ड्रोन है जो एक इंफ्रारेड सेंसर से लैस होता है और धीमी गति से चलने वाले विमानों को निशाना बना सकता है। लेकिन F-35 कोई धीमी गति से चलने वाला जेट नहीं है। इससे पहले ईरान ने अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाने के लिए 358 मिसाइल का इस्तेमाल किया था। ईरान ने यमन में हौथियों को भी ये मिसाइलें सप्लाई की हैं। हूती विद्रोही भी एक बार एफ-35 को गिराने के बहुत करीब आ गये थे। एफ-35 पर ये मिसाइल टकराते टकराते रह गई थी। ईरान अभी तक 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के 12 MQ-9 रीपर ड्रोन को उड़ा चुका है।
ईरान के आसमान पर अमेरिका-इजरायल का कब्जा नहीं!
वहीं डिफेंस एक्सपर्ट शैल बेन-एफ्रैम ने कहा है कि एफ-35 पर हमला होने का मतलब है कि अमेरिका और इजरायल अभी तक ईरान के आसमान पर कंट्रोल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने एफ-35 पर ईरानी एंटी-एयर फायर से निशाना लगने को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
- ऐसा लगता है कि F-35 की स्टील्थ क्षमताओं को एडवांस ईरानी हवाई रक्षा प्रणालियों ने नाकाम कर दिया। यह शायद पहली बार नहीं हुआ है बल्कि पहली बार इसकी रिपोर्ट सामने आई है।
- ईरान का दावा है कि यह घटना ईरान की एकीकृत हवाई रक्षा प्रणालियों में महत्वपूर्ण और लक्षित सुधारों को दर्शाती है। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि रूसी रडार तकनीक और रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग ने इस हमले के लिए जरूरी जानकारी मुहैया कराईं।
- रूस ने शाहेद-136 ड्रोन के सौदे के हिस्से के तौर पर ईरान को Khibiny-M इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट दिए हैं। ये सूट उस डिजिटल कॉर्डिनेशन को बाधित कर सकते हैं जिस पर अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान निर्भर रहते हैं।
- IRGC ने 17 मार्च को कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नष्ट करने का दावा किया था जिसे CENTCOM ने खारिज कर दिया था। लेकिन एफ-35 पर हमला होने के बाद सवाल ये है कि क्या अमेरिका झूठ बोल रहा है?
- ईरान ने मिडिल ईस्ट में कम से कम सात जगहों पर अमेरिका के कम्युनिकेशन सिस्टम और रडार को उड़ा दिया है। ऐसे सेंसर को तबाह करना अकेले ईरान के वश की बात नहीं है। उसे कहीं से 'जरूरी जानकारी' मिल रही है।
- जंग शुरू होने के बाद से अभी तक 16 अमेरिकी सैन्य विमान या तो नष्ट हुए हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।
इसीलिए एफ-35 को अगर ईरान बहुत सीमित क्षमता के साथ निशाना बनाता तो इसका मतलब हुआ कि ये फाइटर जेट अजेय नहीं है। बड़ी शक्तियों के सामने इस फाइटर जेट की असली परीक्ष होगी। या शायद 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा का ये फाइटर जेट बड़ी शक्तियों के सामने पानी मांगता नजर आए।

