ब्रिक्स को लेकर अमेरिकी दवाब में चीन! भारत को दिया झटका, हाईलेवल मीटिंग में नहीं आने के पीछे क्या कारण?
भारत की अध्यक्षता में 14 मई को नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन का कोई भी उच्च प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है। ब्रिक्स का विरोध करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस दौरान 14-15 मई को बीजिंग दौरे पर हैं।
नई दिल्ली: पश्चिमी देशों के प्रभाव को चुनौती देने और विकासशील देशों को वैश्विक मंच पर मजबूत आवाज प्रदान करने के लिए भारत, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर ब्रिक्स की स्थापना की थी। दुनिया भर में धौंस दिखा रहे जिस अमेरिका के खिलाफ अप्रत्यक्ष तौर पर चीन ने समर्थन दिया, अब वही बीजिंग ब्रिक्स समिट को लेकर अमेरिका दबाव में नजर आ रहा है।
मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि 14 मई को भारत में होने वाली ब्रिक्स की मीटिंग में चीन का कोई भी उच्च प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होगा। जबकि इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग के दौरे पर 13 मई को पहुंच रहे हैं। ट्रंप 14-15 मई को चीन में अहम बैठक करेंगे।
मीटिंग में न आने के क्या हैं कारण?
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ब्रिक्स का विरोध करते रहे हैं। वह नहीं चाहते हैं ब्रिक्स समूह मजबूत हो। उन्होंने ही ब्रिक्स देशों पर डॉलर को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया है। साथ ही उन्होंने धमकी दी थी कि दो देश ब्रिक्स में रहकर या उसकी 'अमेरिकी विरोधी' नीतियों का समर्थन करेंगे, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे। उन्होंने दावा किया था कि उनकी धमकियों से कई देश ब्रिक्स से पीछे हट रहे हैं। ब्रिक्स को लेकर अब चीन की बदली रणनीति को ट्रंप के पूर्व बयानों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
- वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। अमेरिका भारत के साथ लगातार अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। यही कारण है कि ट्रंप ने अपने खासमखास सर्जियो गोर को भारत में राजदूत नियुक्त किया। सर्जियो गोर पिछले सप्ता ही अमेरिका से वापस नई दिल्ली आए हैं, वह क्वाड समिट और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए फोकस कर रहे हैं।
ब्रिक्स मीटिंग में रूस के विदेश मंत्री हो सकते हैं शामिल
14 मई को नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथोपिया, ईरान और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, संयुक्त अरब अमिरात की ओर से उप-विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व होने की उम्मीद है। ईरान की ओर से भी उप-विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि चीन के शेरपा प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की उम्मीद है।
ब्रिक्स में किन मुद्दों पर होगी चर्चा
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' थीम निर्धारित की है। 13 जनवरी को 'ब्रिक्स 2026' की वेबसाइट, थीम और लोगो लॉन्च किए गए थे।

