फरचून अस्पताल को दुबारा कियां गया सील एवं अन्य हॉस्पिटल हॉस्पिटलों के निरीक्षण मे मचा हड़कम्प
फरचून अस्पताल को दुबारा कियां गया सील एवं अन्य हॉस्पिटल हॉस्पिटलों के निरीक्षण मे मचा हड़कम्प
कौशाम्बी : जनपद में फार्चून हास्पिटल मंझनपुर को पुन: सील किया गया है गौरतलब है कि फार्चून हास्पिटल ओसा रोड मंझनपुर के नवीनीकरण नही होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की टीम द्वारा 28 नवंबर को सील कर दिया गया था, लेकिन 13 दिसंबर को चिकित्सा विभाग को सूचना प्राप्त हुई की फार्चून हॉस्पिटल में सीलिंग होने के बावजूद उसका ताला तोड दिया गया है जिस पर डॉक्टर हिन्द प्रकाश मणि, उप मुख्य चिकित्साधिकारी, डॉक्टर केडी सिंह उप मुख्य चिकित्साधिकारी की संयुक्त टीम ने 13 दिसम्बर को फार्चून हास्पिटल का निरीक्षण किया गया, जहाँ मौके पर हास्पिटल में
सीलिंग के समय लगाया गया ताला टूटा हुआ पाया गया, जिसके बाद चिकित्सा टीम द्वारा पुनः फार्चून हास्पिटल को सील करते हुये इसकी सूचना थाना मंझनपुर को दिया गया है इसके बाद टीम एनजीएम हास्पिटल ओसारोड मंझनपुर का निरीक्षण किया गया, हास्पिटल पंजीकृत था किन्तु मौके पर चिकित्सक उपलब्ध नही पाये गये जिसपर हास्पिटल संचालक को नोटिस दिया गया, इसके बाद टीम गायत्री पॉली क्लीनिक कोडर दुवरा चौराहा पहुँची जहाँ निरीक्षण करने पर उक्त पॉलीक्लीनिक पंजीकृत था किन्तु मौके पर चिकित्सक उपलब्ध नही पाया गया जिसपर हास्पिटल को नोटिस तामील करायी गयी, टीम द्वारा दिनांक 11 दिसम्बर 2023 को गगनदीप हास्पिटल मल्टीस्पेशिलिटी समदा रोड मंझनपुर कौशाम्बी का भ्रमण की थी, जहाँ हास्पिटल तो पंजीकृत था किन्तु मौके पर चिकित्सक नदारद थे, जिसपर टीम द्वारा उक्त हास्पिटल को भी नोटिस दी गयी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशाम्बी डॉक्टर सुष्पेन्द्र कुमार ने मीडिया के माध्यम से समस्त निजी चिकित्सालय के संचालकों को सख्त हिदायत दी है कि जिन मानकों के आधार पर पंजीकरण कराया गया है उसका अनुपालन सुनिश्चित किया जाय, मानक के विपरीत पाये जाने पर सम्बन्धित निजी प्रतिष्ठानों के पंजीकरण निरस्त की कार्यवाही की जायेगी, इसी के साथ मुख्य
जुल्म के खिलाफ आवाज समय-समय पर उड़ती रही है कभी इस आवाज ने सियासत को पलटा और कभी अत्याचार के खिलाफ उठती यह आवाज सियासत के द्वारा दफना दी गई। कहते हैं जुल्म करना तो गुनाह है ही मगर जुल्म को सहना भी गुनाह है। इसलिए जुल्म के खिलाफ आवाज हमेशा बुलंद करनी चाहिए।
(2)बेहतर दिनों की आस में ग़रीब जुल्म सहता गया
अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की बजाय
वैसे करता रहा जैसे अमीर कहता गया
रोटी कमाने से फुर्सत मिले तो आवाज़ उठाए
भूखे पेट जुल्म के खिलाफ आवाज़ निकलेगी कैसे
अत्याचार के खिलाफ शायरी
एक हो जाओ अत्याचार के खिलाफ
जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ
जो करती है शोषण गरीबों का