हर रोज ऑटो लेकर निकलता था युवक, ढोता था वो सामान जिसकी थी मनाही, सच्चाई जान पुलिस रह गई सन्न
दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर ऑटो रिक्शा आपको सरपट भागती हुई दिख जाएगी. अगर आप सड़क पर खड़े होंगे तो ऑटो वाले खुद आपको देखकर ऑटो रोक लेंगे. कई ऑटो वाले बहुत सही होते हैं और अच्छे से बात करते हैं.
वहीं कई ऑटे वाले बहुत बदतमीज होते हैं. इस खबर में एक ऐसे ऑटो वाले की कहानी हम बताने जा रहे हैं जो दिल्ली में दोहरी जिंदगी जी रहा था. हरु सिंह नाम का ड्राइवर यात्रियों के लिए वह बस एक और ड्राइवर था जो भीड़भाड़ वाली सड़कों पर गाड़ी चला रहा था. लेकिन असल में वह कथित तौर पर एक गुप्त ऑपरेशन चला रहा था.
TOI की रिपोर्ट के अनुसार ऑटो वाला "हथियारों की डिलीवरी" का रैकेट, जो शहर के अंडरवर्ल्ड को मांग पर पिस्तौल पहुंचाता था. हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक सुनियोजित ऑपरेशन में हरु सिंह को गिरफ्तार किया है. इसमें पुलिस ने नकली यात्रियों के रूप में जाल बिछाया था.
हरु, जो छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ चुका था, सालों से ऑटो-रिक्शा चला रहा था. लेकिन उसकी मामूली आय उसके जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं थी. DCP (क्राइम) सतीश कुमार ने कहा "जल्दी पैसे की तलाश में उसने राजस्थान से हथियारों की तस्करी शुरू कर दी और उन्हें दिल्ली के अपराधी नेटवर्क को बेचने लगा."
हरु सिंह का तरीका बहुत था आसान
वह अपने 'ग्राहकों' से ऑर्डर प्राप्त करता, राजस्थान जाकर हथियार इकट्ठा करता और फिर पिस्तौल और कारतूस दिल्ली में डिलीवर करता. उसकी गतिविधियां हाल ही तक अनदेखी रहीं, जब एक सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की. इंस्पेक्टर संजय कुमार और एएसआई राजेंद्र प्रसाद सहित अधिकारियों की एक टीम बनाई गई थी ताकि सिंह को पकड़ा जा सके.
एक सुनियोजित ऑपरेशन में, क्राइम ब्रांच ने यात्रियों के रूप में हरु के ऑटो-रिक्शा को राजोकरी फ्लाईओवर के पास रोका. हरु की गतिविधियों को ध्यान से देखते हुए, अधिकारियों ने वाहन को घेर लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया. ऑटो की तलाशी में चार देसी पिस्तौल और पांच जिंदा कारतूस बरामद हुए. इसके बाद उसे आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में बाद में पता चला कि सिंह दो अन्य आपराधिक मामलों में भी शामिल था, जिनमें एक हत्या का प्रयास भी शामिल है.

