संस्कृत पढ़ना और पढ़ाना शिक्षा ही नहीं बल्कि पूजा है - डॉ० शशिकान्त तिवारी।
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ द्वारा वर्ष 2023 के सितम्बर मे संचालित होने वाली 20 दिवसीय संस्कृत भाषा शिक्षण कक्षा के अंतर्गत बौद्धिक सत्र का आयोजन हुआ। सत्र का उत्कृष्ट संचालन प्रशिक्षक विनय प्रकाश तिवारी ने किया। लौकिक मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। संस्थान गीत मोहित ने प्रस्तुत किया और नीतू से स्वागत गीत प्रस्तुत किया। महराजगंज से उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के प्रशिक्षक आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने अतिथि परिचय कराया तथा कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं समस्त शिक्षक और छात्राओं का स्वागत किया। तत्पश्चात उदय बालकिशन और लीला ने संस्कृत कक्षा से संबंधित अपने अनुभव साझा किए। प्रीती ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि बैजनाथ पाण्डेय आर्य संस्कृत महाविद्यालय के दर्शन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ० शशिकान्त तिवारी ने संस्कृत की उपदेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व संस्कृति एवं विशेष रूप से भारत के संरक्षिका मात्र संस्कृत भाषा हैं। संस्कृत का कार्य केवल कार्य नहीं अपितु पूजन है। संस्कृत का अध्ययन साक्षात देशसेवा है। संस्कृत एक भाषा ही नहीं अपितु जीवन की पद्धति है। संस्थान का उपक्रम प्रशंसनीय हैं। उन्होंने शास्त्र संरक्षण में संस्कृत की मुख्य भूमिका को प्रतिपादित किया। प्रशिक्षक लक्ष्मीकांत ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के निदेशक विनय श्रीवास्तव ,प्र. अधिकारी डॉ. दिनेश मिश्र, सर्वेक्षिका डॉ. चंद्रकला शाक्या , प्रशिक्षण प्रमुख सुधीष्ठ मिश्र, समन्वयकगण धीरज मैठाणी, दिव्य रंजन तथा राधा शर्मा, प्रशिक्षक महेन्द्र मिश्रा व अन्य सामाजिक जन आनलाइन माध्यम से उपस्थित थे।

