Tungnath Temple History : तुंगनाथ विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, जहां रावण ने भी की थी तपस्या

देवों के देव महादेव के वैसे तो कई मंदिर है लेकिन, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित तुंगनाथ विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान शिव की भुजाएं है। इस मंदिर के वर्णन महाभारत से लेकर रामाणय काल तक में मिलता है। आइए जानते हैं तुंगनाथ के बारे में विस्तार से।

Tungnath Temple History : तुंगनाथ विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, जहां रावण ने भी की थी तपस्या

तुंगनाथ विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। तुंगनाथ पंच केदार में शामिल है। पंच केदारों में शामिल तुंगनाथ की पुराणों में दिव्य और विशेष महिमा बताई गई है। तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजाएं प्रकट हुई थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण अर्जुन ने कराया था। इस मंदिर में पांडवों ने भ्राता मृत्यु से मुक्ति पाने के लिए तपस्या की थी। तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। आइए जानते हैं तुंगनाथ से जुड़ी पौराणिक कथा।

विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर
पंच केदार में से एक तृतीया तुंगनाथ धाम है। इस स्थान पर शिवजी के हृदय स्थल और भुजा की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि यह विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। यह 3,680 मीटर (12,073 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। जब महाभारत युद्ध समाप्त हुआ उसके बाद पश्चाताप के लिए सभी पांडव भगवान शिव की खोज में निकल पड़े। जब भगवान शिव का यह ज्ञात हुआ तो वह पांडवों से छिपने लगें।प पांडव भी भगवान शिव का पीछा करते करते केदार पहुंच गए। वहां शिवजी ने बैल का रुप धारण कर लिया और बाकी पशुओं के बीच जाकर बैठ गए। तब भीम को संदेह हुआ और उन्होंने भगवान शिव को पहचान लिया।

 



तुंगनाथ में निकली थी भगवान शिव की भुजाएं
भीम ने बैल की पीठ को पकड़ लिया और भगवान शिव अपना आकार बड़ा करते चले गए। उनकी पीठ जहां रह गई वह स्थान केदारनाथ बन गया और जहां उनकी भुजाएं निकली वह स्थान तुंगनाथ बना। इसी तरह केदारनाथ के साथ मिलकर यह सभी पंच केदार कहलाते हैं।

रामायण काल से भी है तुंगनाथ मंदिर का संबंध
मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। वहीं, भगवान राम ने जब रावण का वध किया था उसके बाद भगवान राम तुंगनाथ से डेढ़ किलोमीटर दूर चंद्रशिला पर आकर ध्यान किया और वहां कुछ वक्त अकेले बिताया था। मान्यता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के साथ साथ पंच केदार की यात्रा कर लेता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान शिव की भी असीम कृपा ऐसे लोगों पर बनी रहती है।