Great Nicobar Project: लाल चीन के मन में क्या है काला-काला, भारत ने खोज लिया ड्रैगन को काबू में रखने वाला ताला

Great Nicobar vs China : ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट को लेकर जहां सरकार मजबूत इरादे के साथ आगे बढ़ रही है तो वहीं, पर्यावरणविद और विपक्ष इसका विरोध इस आधार पर कर रहे हैं कि इससे ग्रेट निकोबार का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा। हालांकि, इसे लेकर एक बड़ी चिंता चीन को भी सता रही है।

Great Nicobar Project: लाल चीन के मन में क्या है काला-काला, भारत ने खोज लिया ड्रैगन को काबू में रखने वाला ताला

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 2021 में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की शुरुआत की, जो कि स्ट्रेटेजिक लोकेशन पर है। यह लोकेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां जहाजी और नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। खासतौपर पूर्वी हिंद महासागर और भारत की इंडो-पैसिफिक में भूमिका बढ़ाने के लिहाज से यह प्रोजेक्ट अहम माना जा रहा है। वह भी तब जब चीन इस पूरे समुद्री इलाके में अपने पांव पसार रहा है। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को एक बार फिर लेटर लिखा है।

ग्रेट निकोबार: जयराम रमेश ने पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया

  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को ग्रेट निकोबार द्वीप प्रोजेक्ट के बारे में पत्र लिखा। उन्होंने इसमें पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि इस प्रोजेक्ट के अलग-अलग पहलुओं का पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का आकलन 'साफ तौर पर अपर्याप्त' है।
  • पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने यादव को लिखे अपने नए पत्र में कहा, '3 जून 2026 को मेरे पत्र के जवाब में 13 जून 2026 को आपका जो भी जवाब मिला,उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। भले ही वह निराशाजनक और असंतोषजनक रहा हो। मुझे एक बार फिर यह कहते हुए खेद हो रहा है कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के कई पहलुओं के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन साफ तौर पर अपर्याप्त है और यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरता है।'
  • कहां है ग्रेट निकोबार, पहले इसे जानते हैं

    • ग्रेट निकोबार मलक्का स्ट्रेट के बेहद करीब छह डिग्री चैनल के पास है। मलक्का की खाड़ी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर से जुड़ा हुआ है।
    • इसी रास्ते से पूरी दुनिया का एक तिहाई सामान गुजरता है और इसी रास्ते से दुनिया का 30 फीसदी तेल भी गुजरता है।
    • वहीं, राजीव गांधी और आदित्य बिड़ला की बायोग्राफी लिखने वाले बायोग्राफर मिनहाज मर्चेंट ने लिखा- जैसा कि मैंने पहले लिखा था, रणनीतिक, आर्थिक और सैन्य नजरिए से बेहद अहम #GreatNicobarProject का #China, #Congress और #China से पैसे लेने वाले एक्टिविस्ट/पत्रकार जोर-शोर से विरोध कर रहे हैं। निकोबार #India को एक समुद्री ताकत के तौर पर उभारेगा, क्योंकि यह उस जलडमरूमध्य (strait) में स्थित है जहां हिंद महासागर और प्रशांत महासागर मिलते हैं।
    • चीन की नींद क्यों उड़ा रहा ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट

      • ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट चीन की विस्तारवादी नीतियों और हिंद महासागर में उसकी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) की घेराबंदी का मुकाबला करने के लिहाज से बड़ा गेमचेंजर बनेगा।
      • यह प्रोजेक्ट मलक्का स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने पर स्थित है। चीन के कुल कारोबार का करीब दो-तिहाई और उसके कच्चे तेल का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है।
      • ग्रेट निकोबार में भारत की मजबूत मौजूदगी चीन की मलक्का 'लाइफलाइन' पर कड़ी निगरानी रखने में मदद करती है।
      • यह द्वीप भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक चोकपॉइंट के रूप में भी काम करेगा।
      • ग्रेट निकोबार का बुनियादी ढांचा भारतीय सेना को समंदर के बीचों-बीच एक ऐसा 'अभेद्य एयरक्राफ्ट कैरियर' प्रदान करता है, जिसे डुबोया नहीं जा सकता।
        • यहां बनाए जाने वाले आधुनिक और रणनीतिक पोर्ट और एयरबेस से हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों और जासूसी जहाजों पर नजर रखी जा सकेगी।
        • ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है

          • ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 81,000 करोड़ रुपये है। यह ग्रेट निकोबार का 16,610 हेक्टेयर को कवर करता है।
          • इसे तीन चरणों में विकसित किया जाना है। इसमें एक 149.6 वर्ग किलोमीटर का एक टाउनशिप भी बनाने की योजना है। यह सिटी ऑफ फॉरेस्ट की तर्ज पर डिजाइन होगा।
          • 10.4 वर्गकिमी को एक ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बनेगा, जो सालाना 1 करोड़ से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
          • ग्रेट निकोबार आबादी: 7,000 फीसदी बढ़ जाएगी

            • जनजातियों के अलावा, ग्रेट निकोबार में सामान्य लोग भी रहते हैं। इनमें से ज्यादातर एक्स सर्विसमैन और उनके परिवार हैं, जिन्हें सरकार ने 1970 के दशक में यहां लाकर बसाया था।
            • 2011 की जनगणना के अनुसार, ग्रेट निकोबार की करीब 85 फीसदी आबादी बसी-बसाई है। कुल में से महज 237 लोग शोंपेन और 1,094 लोग निकोबारी जनजाति के हैं।
            • सरकार के अनुमान के अनुसार, ग्रेट निकोबार की आबादी 2050 तक बढ़कर 6.5 लाख हो जाएगी, जो 2011 की जनगणना के मुकाबले 78 गुना तक बढ़ जाएगी।
            • ग्रेट निकोबार के पीछे असली डर क्या है

              • ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बनने से आशंका जताई जा रही है कि 130.8 वर्गकिमी जंगल की जमीन, ट्राइबल के सुरक्षित जमीन असुरक्षित हो जाएगी, जिन्हें प्रोजेक्ट के चलते स्थानांतरित किया जा सकता है।
              • 227 हेक्टेयर जमीन पर बंदरगाह बनाने की योजना है, जिससे तटीय कोरल रीफ और कछुओं के घोंसलों को नुकसान पहुंच सकता है। खासतौर पर गलाथिया की खाड़ी में कछुओं की जिंदगी तितर-बितर हो सकती है।
              • इसके अलावा, यह पूरा इलाका भूकंप संवेदनशील इलाका है, जिससे इस पूरे क्षेत्र में आपदा आ सकती है।
              • साथ ही इस द्वीप पर रहने वाली बेहद संवेदनशील इंसानी जनजाति शोंपेन की आबादी महज 237 और निकोबारी की करीब 1,000 ही है, जिन पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।


              ग्रेट निकोबार: कितना एरिया होना है इस्तेमाल

              • ग्रेट निकोबार के कुल क्षेत्रफल यानी 910 वर्ग किलोमीटर का 18 फीसदी या 166 वर्ग किलोमीटर का एरिया इस प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल होना है।
              • इस द्वीप का 85 फीसदी हिस्सा बेंगलुरु शहर जितना है, जो ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट से ढका हुआ है।


              नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का क्या कहना है

              • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का कहना है कि यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट आईलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन नोटिफिकेशन का उल्लंघन नहीं करता है। न ही यह मूंगे की चट्टानों यानी कोरल रीफ्स को ही नुकसान पहुंचाता है।
              • किसी भी पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए 7.1 लाख पेड़ लगाए गए हैं। साथ ही 97.3 वर्ग किमी की जमीन हरियाणा में वन लगाने के लिए रखी गई है।


              यह पहुंचना इतना आसान भी नहीं है

              • ग्रेट निकोबार जाने के लिए पोर्ट ब्लेयर के लिए फ्लाइट लेनी पड़ेगी। वहां से कैंपबेल बे में लंगर डाले नौसैनिक वायु स्टेशन यानी आईएनएस बाज तक जाना होगा। ऐसा नहीं कर सकते तो कई दिनों की जहाजी यात्रा करनी पड़ेगी।
              • विजिटर को ट्राइबल एरिया समेत ग्रेट निकोबार तक जाने के लिए मंजूरी लेनी होगी। साथ ही पहचानपत्र, सरकारी स्पॉन्सरशिप और गजेटेड ऑफिसर से प्रमाणित कैरेक्टर सर्टिफिकेट भी लेकर जाना होगा।
              • विदेशियों को गृह मंत्रालय की मंजूरी लेनी जरूरी होगी।