भारत से गुजरेगा शांति का रास्ता? आखिर क्यों हैं हम पर ऐतबार
रुस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच शांति स्थापना के लिए भारत को उम्मीद भरी निगाहों से देखा जा रहा है. इस युद्ध के दौरान भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है. रूसी राष्ट्रपति पुतिन हों या यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बिना किसी लाग लपेट दोनों को शांति का संदेश दिया है.
ख़ास बात ये है कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों को भारत पर भरोसा है और अब पुतिन ने खुद साफ शब्दों में कह दिया है कि शांति समझौते के लिए उन्हें भारत की मध्यस्थता मंज़ूर है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि भारत पर भरोसे की वजह आखिर क्या है. भारत की पीस डिप्लोमेसी कैसे रास्ता दिखा सकती है. शांति के इस कूटनीतिक अध्याय को ख़ास रिपोर्ट में समझिए.
यूक्रेन और रूस के बीच 30 महीनों से लगातार युद्ध चल रहा है. युद्ध के कारण भीषण तबाही मची है. अब तक 80 हजार से ज्यादा सैनिकों की मौत हो चुकी है, लेकिन क्या यह युद्ध रुक सकेगा? क्या भारत इस युद्ध को रोक सकता है? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्यस्थता से बात बनेगी और क्या पुतिन ने पीएम मोदी के नाम पर मुहर लगा दी है? इन सारे सवालों का जवाब जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बयान देकर कहा है कि यूक्रेन से रूस की शांति के लिए समझौते में भारत की मध्यस्थता उन्हें मंजूर है. व्लादिवोस्तोक में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम के वार्षिक अधिवेशन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन शांति के लिए इच्छुक दिखे.

