नई दिल्ली: संसद में हुए घुसपैठ का मुख्य मास्टरमाइंड ललित झा दिल्ली में गिरफ्तार, पुलिस का दावा वीडियो बनाकर हुआ था फ़रार।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान क्रांतिकारी भगत सिंह द्वारा ‘सेंट्रल असेंबली’ के अंदर बम फेंके जाने जैसी घटना को दोहराना चाहते थे।

नई दिल्ली: संसद में हुए घुसपैठ का मुख्य मास्टरमाइंड ललित झा दिल्ली में गिरफ्तार, पुलिस का दावा वीडियो बनाकर हुआ था फ़रार।

नई दिल्ली: संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को घटना में शामिल छठे आरोपी और कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ललित झा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। हालांकि पुलिस ने कहा कि आरोपी ललित मोहन झा खुद चलकर थाने आया था। उससे पूछताछ की जा रही है। सूत्रों ने कहा कि वह कर्त्तव्य पथ पर स्थित पुलिस स्टेशन में गया और सरेंडर कर दिया। इसके बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है और नई दिल्ली जिला पुलिस ने उसे स्पेशल सेल को सौंप दिया है।

मौके से फरार हुआ था ललित

दिल्ली पुलिस ने बताया कि ललित मोहन झा घटना का वीडियो बनाने के बाद मौके से भाग गया था। वह बस से राजस्थान के नागौर पहुंचा। वहां वह अपने दो दोस्तों से मिला और एक होटल में रात बिताई। जब उसे पता चला कि पुलिस उसकी तलाश कर रही है तो वह बस से दिल्ली आ गया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले घटना के कथित मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे ललित झा को पकड़ने के लिए कई स्थानों पर दबिश दी जा रही थी। 

इससे पहले पुलिस ने सुरक्षा चूक के मामले में आतंकवाद निरोधक कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान क्रांतिकारी भगत सिंह द्वारा ‘सेंट्रल असेंबली’ के अंदर बम फेंके जाने जैसी घटना को दोहराना चाहते थे। पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने स्मोक (धुआं) बम का उपयोग करने के बाद संसद में पर्चे फेंकने की योजना बनाई थी। इसने कहा कि उन्होंने तिरंगे भी खरीदे थे।

कोलकाता से है ललित

पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने संदिग्ध मुख्य साजिशकर्ता ललित झा के बारे में और जानकारी हासिल करने के लिए एक एनजीओ के संस्थापक नीलाक्ष ऐश से संपर्क किया था। बताया जाता है कि झा कोलकाता स्थित एक एनजीओ का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की कई टीम ललित झा को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। अधिकारियों का मानना है कि वह मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक हो सकता है। दिल्ली पुलिस की एक टीम पहले से ही कोलकाता में थी।

गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों-सागर शर्मा (26), मनोरंजन डी (34), अमोल शिंदे (25) और नीलम देवी (37) की चिकित्सीय जांच आधी रात को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि संसद मार्ग थाने में यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य) और 18 (साजिश आदि) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 452 (अनधिकार प्रवेश), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना), 186 (लोकसेवक के सार्वजनिक कार्य निर्वहन में बाधा पहुंचाना) और 353 (लोकसेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस गुरुग्राम निवासी विशाल शर्मा उर्फ विक्की और उसकी पत्नी से भी पूछताछ कर रही है क्योंकि गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी मंगलवार रात शर्मा के आवास पर रुके थे। यूएपीए के तहत दर्ज मामले गैर जमानती होते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को अब तक किसी भी आतंकी समूह के साथ आरोपियों के संबंध नहीं मिले हैं। चारों लोग सोशल मीडिया से संपर्क में आए थे और फिर फेसबुक पर भगत सिंह ‘फैन पेज’ से जुड़े थे।

मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अब तक, सभी चारों आरोपियों ने दावा किया है कि उन्होंने खुद ही पूरी घटना की साजिश रची और खुद ही उसे अंजाम दे रहे थे।" पुलिस सूत्रों ने कहा कि बुधवार की सुरक्षा चूक के मामले में कुछ और लोगों की भूमिका का संदेह है जिससे जांच का दायरा बढ़ाया गया है। गिरफ्तार किए गए सभी चार लोगों को शहर की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

क्या है पूरा मामला?

सागर शर्मा और मनोरंजन डी संसद के शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए और उन्होंने 'केन' से पीली गैस उड़ाते हुए नारेबाजी की। हालांकि, सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया। लगभग उसी समय संसद भवन के बाहर अमोल शिंदे और नीलम ने केन से लाल और पीले रंग का धुआं फैलाते हुए "तानाशाही नहीं चलेगी" आदि नारे लगाए। सुरक्षा में चूक की यह घटना 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी के दिन हुई।

इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विशेष प्रकोष्ठ की जांच में दो संगठनों के नाम भी सामने आए हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी जांच टीम को एक ही जवाब दे रहे हैं। ललित झा, सागर और मनोरंजन करीब एक साल पहले मैसूर में मिले थे, जहां उन्होंने संसद में घुसने की साजिश रची थी। बाद में, उन्होंने नीलम और अमोल को भी साजिश में शामिल कर लिया।

अधिकारी ने कहा कि ललित ने अगुवाई की और मनोरंजन को मानसून सत्र के दौरान संसद के सभी प्रवेश द्वारों की रेकी करने (टोह लेने) का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "जुलाई में मनोरंजन दिल्ली आया और एक सांसद के नाम पर जारी आंगतुक पास से संसद के अंदर गया। वहां उसे पता चला कि जूतों की तलाशी नहीं होती है।" ललित की आखिरी लोकेशन राजस्थान-हरियाणा सीमा पर नीमराणा में मिली थी। पुलिस ने पहले कहा था कि सभी पांचों 10 दिसंबर को एकत्र हुए थे और गुरुग्राम में विशाल शर्मा के आवास पर रुके थे।