शारदीय नवरात्र पर्व का प्रारम्भ 15 अक्तूबर दिन रविवार से होगा- ज्योतिषाचार्य दिवाकर म​णि त्रिपाठी

इस बार शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। हाथी भगवान गणेश जी का स्वरूप है। इसलिए यह नवरात्र मंगलमय रहेगा।  माँ पीताम्बरा जनकल्याण ज्योतिषकेंद्र के ज्योतिषाचार्य दिवाकर म​णि त्रिपाठी के अनुसार वर्ष 2023 का शारदीय नवरात्र चंद्रग्रहण से पहले आ रहा है। माता का हाथी पर सवार होकर आना और चंद्र ग्रहण से पहले नवरात्र के संयोग से भारत सुखी और समृद्ध बना रहेगा। इस तरह का महासंयोग 26 वर्षों के बाद आ रहा है। 
शारदीय नवरात्र पर्व का प्रारम्भ 15 अक्तूबर दिन रविवार से होगा। उन्होंने बताया कि 14 अक्तूबर दिन शनिवार की रात 10 बजकर 54 मिनट से प्रतिपदा प्रारंभ होकर 15 अक्तूबर को रात 11 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो रही है। 14 अक्तूबर दिन शनिवार को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। यह नक्षत्र रविवार को शाम 6 बजकर 43 मिनट तक है। यदि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग हो तो उस समय कलश स्थापन का निषेध है, लेकिन शास्त्रों में ऐसा निर्णय है कि चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण से चौथे चरण तक कलश स्थापना की जा सकती है। 

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
वैधृति योग 15 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट तक है। ऐसे में कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11.38 बजे से लेकर दोपहर 12.23 बजे (अभिजित मुहूर्त) तक है। इस वर्ष नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक मां की आराधना होगी। इस बार नवरात्र में तिथि क्षय नहीं है। नवरात्र में मां की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नवरात्र की तिथियां...
प्रतिपदा (शैलपुत्री)     15 अक्तूबर
द्वितीया (ब्रह्मचारिणी)  16 अक्तूबर 
तृतीया (चन्द्रघण्टा)       17 अक्तूबर 
चतुर्थी (कुष्माण्डा)        18 अक्तूबर 
पञ्चमी (स्कन्दमाता)      19 अक्तूबर 
षष्ठी  (कात्यायनी)          20 अक्तूबर 
सप्तमी (कालरात्री)         21 अक्तूबर 
अष्टमी  (महागौरी)          22 अक्तूबर 
नवमी   (सिद्धिदात्री)       23 अक्तूबर