शरीर के साथ मस्तिष्क का स्वस्थ्य होना भी जरूरी-प्रधान जिला न्यायाधीश

शरीर के साथ मस्तिष्क का स्वस्थ्य होना भी जरूरी-प्रधान जिला न्यायाधीश

शाजापुर। एडीआर भवन शाजापुर में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति न्यायालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों को जागरूक करने तथा मानसिक रोग अथवा तनाव से मुक्ति के संबंध में प्रेरित करने हेतु विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शनिवार को न्यायाधीशों की मौजूदगी में संपन्न हुए कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर  ने संबोधित करते हुए कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी अच्छा होना जरूरी है, हमें अपने मन में सकारात्मक विचार रखना चाहिए तभी हम अवसाद और निराशा का मुकाबला कर सकेंगे। साथ ही समस्त कर्मचारियों को मानसिक तनाव को दूर करने के लिए नियमित रूप से योग, व्यायाम एवं प्रसन्न रहने के उपाय पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। शिविर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं एमवॉय हास्पिटल इंदौर से आए चिकित्सक डॉ सुनील जायसवाल के द्वारा सहज योग एवं ध्यान की पद्धति से शांति, निर्विचार अवस्था की प्राप्ति कैसे करें इससे अवगत कराया। उन्होने मानसिक स्वास्थ्य में ध्यान का महत्व विषय पर प्रोजेक्टर के माध्यम से सहज योग की प्रस्तुति देते हुए व्यवहारिक अनुभव कराया। साथ ही कहा कि मानसिक स्वास्थ्य हेतु सहज योग एक रामबाण ईलाज है जिससे हम स्वयं की देखभाल कर सकते हैं। उन्होने मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के व्यवहार एवं भावनाओं में क्या परिवर्तन आता है उस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पीडि़त लोग अलग रहना, लोगों से बात नहीं करना, नींद नहीं आना, भूख नहीं लगना, हमेशा उदास रहना, छोटी-छोटी बातों पर अत्याधिक गुस्सा करने जैसी समस्याओं से ग्रसित दिखाई देते हैं। उन्होने कहा कि इस बदलती दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य, युवा किशोरावस्था और वयस्क के प्रारंभिक वर्ष जीवन का एक ऐसा समय होता है जब कई परिवर्तन होते हैं। शासकीय सेवा के दौरान दवाब में अथवा लक्ष्य पूर्ति के लिए मानसिक तनाव के कारण कार्य कुशलता में कमी आती है। अत्याधिक मानसिक तनाव के कारण ग्रस्ति व्यक्ति आत्महत्या का सहारा ढूंढने लगता है। शरीर में नाड़ी तंत्र को ठीक करने के लिए मेडिटेशन किया जा सकता है। मानसिक तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन क्रियाकलाप कर मानसिक तनाव से बचें एवं दूसरों को भी इन कारणों की पहचान करवा कर मानसिक रोग के प्रति जन सामान्य को जागरूक कर इस पुनित कार्य में सहयोग करें क्योंकि मानसिक तनाव से मुक्ति पाने में कारगर सिद्ध हो रहा सहजयोग ध्यान। जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजेन्द्र देवड़ा ने कार्यक्रम कें अंत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हुए निरंतर मेडिटेशन करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर न्यायाधीश मोहम्मद अजहर, नीतूकांता वर्मा, दिनेशकुमार नोटिया, प्रवीण शिवहरे, अनिलकुमार नामदेव, आशीष परसाई, व्यवहार न्यायाधीश आदिल अहमद खान, अनिरूद्ध जैन, डॉ स्वाती चौहान, सतीश कुमार शुक्ला, धीरज आर्य, विधिक अधिकारी फारूक अहमद सिद्दीकी, जिला अभिभाषक संघ अध्यक्ष कमल किशोर श्रीवास्तव सहित न्यायालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।