शाजापुर - जिला जेल में बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह अंतर्गत मानसिक बीमारी की पहचान करने व उपचार के बताएं तरीके
शाजापुर। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के द्वारा प्रेषित कार्ययोजना के पालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर के मार्गदर्शन में तथा जिला न्यायाधीश एवं सचिव राजेंद्र देवड़ा के मुख्य आतिथ्य तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष परसाई के विशिष्ट आतिथ्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाजापुर के तत्वाधान में जनसाहस संस्था के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह अंतर्गत गुरुवार को जिला जेल शाजापुर में मानसिक बीमारी की पहचान व उसके निराकरण एवं उपचार करने के उद्देश्य से जागरूकता सह विधिक सक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकारण के सचिव एवं जिला न्यायाधीश राजेंद्र देवड़ा ने मानसिक रूप कंमजोर व दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कानून संबंधी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक रूप से बीमार और दिव्यांग व्यक्ति को भी गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए वा न्याय दिलाने में मदद करनी चाहिए। जेल में रहने के दौरान अधिकांश बंदी मानसिक तनाव ग्रस्त हो जाते है। मानसिक तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन क्रियाकलाप किया जा सकता है। मानसिक तनाव से बचने एवं कारणों को पहचाने के उद्देश्य से मानसिक रोग के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। इस दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष परसाई द्वारा बताया गया कि समाज के संचालन के लिए जो नियम और कानून बनाये है, उसको जारी रखने के लिए जो इसका उलंघन करने वालों को जेल में रखा जाता है। यह तो एक विधिक प्रक्रिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आप जेल मे तनाव का जीवन जिए, क्योंकि तनाव लेने से आप अपने शरीर को भी खतरे में डाल रहे है, जिसके परिणाम स्वरूप आपके परिवार में भी तनाव एवं चिंता बनी रहती है। इसलिए जेल में रहने के दौरान तनाव मुक्त जीवन जीने की कला सीखना आवश्यक है। जिला विधिक सहायता अधिकारी फारूक अहमद सिद्दीकी के द्वारा मानसिक बीमारियों के लक्ष्ण बताते हुए कारण व निवारण के बारे में नालसा मानसिक रूप, अस्वस्थ बीमार व्यक्तियों के लिए विधिक सेवा योजना के बारे मे समझाया गया। साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य हर व्यक्ति को कानूनी जानकारी प्रदान करना है। वहीं गरीब एवं पात्र व्यक्ति को निःशुल्क न्याय प्रदान करना है। जन साहस संस्था की ओर से भोपाल से पधारे प्रोफेशनल काउन्सलर सुश्री सहाराजी के द्वारा जेल बंदियों को मेडिटेशन की कई क्रियाएं बताकर समझाया गया कि शारीरिक रोग को पहचानना सरल है किन्तु मानसिक रोग को पहचाना कठिन है। यदि आपकों नींद नहीं आती है, भूख नहीं लगती है, चिडचिडापन रहता है अथवा एकान्त रहना अच्छा लगता है तो बंदी मानसिक रोग से ग्रस्त हो सकते है, जिसके लिए आवश्यक है कि आप अपने लिए समय निकाले और अपना ध्यान रखें जो कार्य करने में सुख शांती या आनंद की प्राप्ति हो उसे अपने दैनिक क्रियाकलाप में शामिल करें। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य में ध्यान का महत्व विषय पर प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुति देते हुए व्यवहारिक अनुभव कराया। साथ ही जिसमें मानसिक स्वास्थ्य क्या है, काउंसलिंग क्या है? स्वयं की देख भाल कैसे करें इन मुद्दों पर बात की गई। इस अवसर पर प्रशिक्षु न्यायाधीश धीरज आर्य, जेल प्रहरी पंकज तोमर, सहित जेल स्टॉफ, जन साहस संस्था राहुल, ज्योति मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन जेल अधीक्षक गोपाल गौतम एवं आभार उप जेल अधीक्षक बी.एल. मण्डलेकर के माना।

