|| सब जाग रहे तू सोता रह ||
|| सब जाग रहे तू सोता रह ||
सब जाग रहे तू सोता रह, किस्मत को थामें रोता रह। जो दूर है माना मिला नही, जो पास है वो भी खोता रह।
लहरों पर मोती चमक रहे, झोंके भी तुझ तक सिमट रहे। न तूफान कोई आने वाला, सब तह तक गोते लगा रहे। लहरें तेरी क़दमों में हैं, तू नाव पकड़ बस रोता रह। सब जाग रहे तू सोता रह, सब जाग रहे तू सोता रह।
धुप अभी सिरहाने है, मौसम जाने पहचाने है। रात अभी तो घंटों है, बस कुछ पल दूर ठिकाने है। इतनी दूरी तय कर आया, दो पग चलने में रोता रह, सब जाग रहे तू सोता रह।
माना कि मुश्किल भारी है, पर तुझमें क्या लाचारी है। ये हार नही बाहर की है, भीतर से हिम्मत हारी है। उठ रहे यहाँ सब गिर गिरकर, न उठ तू यूं ही लेटा रह। सब जाग रहे तू सोता रह ।


