बुंदेलखंड का किसान,2800 करोड़ के कर्ज में,जान बचाने के लिए बेचना पड़ रहा जमीन और मकान
रिपोर्ट_ पंजाब सिंह झांसी
बुंदेलखंड का किसान,2800 करोड़ के कर्ज में,जान बचाने के लिए बेचना पड़ रहा जमीन और मकान
बुंदेलखंड के किसानों पर लगातार कर्ज बढ़ता जा रहा है, बुंदेलखंड के किसानों की तरफ न तो सरकार को सुध है न ही सरकार को रुचि।. लगातार मौसम की मार की वजह से किसान दिनों-दिन और भी कर्ज के नीचे दबता जा रहा है.
तमाम सरकारी वादों और दावों के बावजूद बुंदेलखंड का किसान अभी भी कर्जे में डूबता जा रहा है.सिर्फ झांसी जिले में किसानों के ऊपर 28 सौ करोड़ का कर्ज है. मौसम की मार झेल रहे यहां के किसान अभी भी कर्ज से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं. वहीं हर बार सरकारें कई बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन किसानों तक मुमकिन मदद नहीं पहुंच पा रही है. क्षेत्र के कई किसान अपनी जमीन और मकान सिर्फ इसलिए बेचने को तैयार हैं क्योंकि वह कर्ज से छुटकारा पाना चाहते है। उससे उबरने का अब उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं है।
जिले के गुरसराय थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले किसान महीपत ने बताया कि उन्होंने 2013 में 40 हजार रुपये का कर्ज लिया था. यह कर्ज उन्होंने सूखे की मार के बाद फसल खराब होने के बाद लिया था. धीरे-धीरे रकम बढ़ती रही और वह अपने बाकी जिम्मेदारियों में उलझे रहे और मौसम की मार साल दर साल उन्हें और खोखला करती रही। अब कर्जे की रकम 40 हजार रुपए से बढ़कर 4 लाख रूपए हो गई है. बेबस में उन्हें अपनी जमीन बेच कर कर्ज चुकाना पड़ा।
इलाज के लिए भी नहीं पैसे
कुछ ऐसी ही कहानी टहरौली के किसान रमजू अहिरवार ने बताए कि उन्होंने करीब 4 साल पहले बैंक से लोन लिया था. उन्हें यह लोन उनकी जमीन पर दिया गया था. लोन की राशि उन्होंने निजि काम में खर्च भी कर ली. इसके बाद फसल भी चौपट हो गई तो वह लोन नहीं भर पाए. उनकी पत्नी की तबीयत भी खराब हो गई जिसके इलाज के लिए उन्हें अब पैसे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि जमीन के कागज बैंक के पास हैं.
कर्ज में डूबा किसान
सरकारी आंकड़ों की मानें तो जिले के करीब ढाई लाख किसानों पर बैंक का 2800 करोड़ रुपये का कर्ज है. बुंदेलखंड का किसान लगातार सरकारी कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है. जिले में करीब 44 हजार किसान ऐसे हैं जो कर्ज वापस नहीं कर पा रहे हैं.

