RJD कांग्रेस के MP या MLA नहीं, बीजेपी के टार्गेट पर विरोधी दलों के संगठन वाली जड़ें, समझिए कैसे
Bihar Politics: बिहार में बीजेपी ने विरोधी दलों में सेंधमारी शुरू कर दी है। बड़ी बात ये है कि उसके टार्गेट पर विधायक या सांसद नहीं बल्कि जिलों में बना संगठन है। क्यों बीजेपी विरोधी दलों के संगठन पर टार्गेट कर रही, समझिए इस खबर में।
पटना: बीजेपी इन दिनों केवल सदन में ही अपने नंबर बढ़ाने का गेम प्लान नहीं कर रही है। क्षेत्रीय पार्टी के विरुद्ध भी वैसे ही प्लान बनाने में बीजेपी के रणनीतिकार जुटे हुए हैं। खास कर जिला या प्रखंड स्तर पर उनकी ताकत बने हुए हैं। यह समय भले किसी विधानसभा या लोकसभा चुनाव का नहीं है। पर अभी का सबसे सटीक समय पार्टी के विस्तार का है जहां बीजेपी की रणनीति बूथ लेवल से जिला स्तर पर पार्टी को मजबूत करना है। बीजेपी ने बुधवार को ही सिवान और सारण में यह खेल रच राजद सुप्रीमो लालू यादव के गढ़ में अपनी पार्टी का विस्तार कर एक चुनौती दे डाली।
लालू के इलाके में सेंधमारी
बीजेपी ने कल ही बुधवार को सारण और सिवान के जाने माने राजद नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिलाकर सेंधमारी अभियान की शुरुआत कर दी है।भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित बुधवार 24 जून के मिलन समारोह में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष और राजद नेत्री लीलावती गिरी, रालोजपा महासचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल, छात्र लोजपा (पारस) गुट के राहुल यादव सहित कई नेताओं ने शामिल हो कर बीजेपी के प्रति अपनी आस्था जताई। इस अभियान के सूत्रधार पूर्व स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय माने जा रहे हैं।
क्यों ऐसा कर रही है भाजपा?
जनाधार बढ़ाने के पीछे बीजेपी का प्रयास लॉजिकल सही भी है। ऐसा इसलिए कि वर्तमान समय में राज्य के अन्य दलों से आए लोगों को यह विश्वास है कि बीजेपी के भीतर सम्मान मिलेगा। उनमें पास बड़े उदाहरण के तौर पर सम्राट चौधरी खुद ही हैं। इसके अलावा शंभू पटेल, भीम सिंह, प्रह्लाद यादव, संगीता देवी, भरत बिंद जैसे उदाहरण भरे पड़े हैं।
ये नेता दूसरी पार्टियों से आए और बीजेपी में मिला सम्मान
- सम्राट चौधरी
- शंभू पटेल
- भीम सिंह
- प्रह्लाद यादव
- संगीता देवी
- भरत बिंद
तात्कालिक निशाना पर पंचायत चुनाव
बीजेपी सूत्रों की माने तो इस बार प्रदेश के रणनीतिकारों के निशाने पर पंचायत और नगर निकाय चुनाव है। मिली जानकारी के अनुसार दिसंबर 2026 में मुखिया-सरपंच का कार्यकाल समाप्त हो जाना है। दिसंबर से पहले पंचायत चुनाव करा लेना है। अंदाज है कि अगस्त 2026 में पंचायत चुनाव का नोटिफिकेशन भी हो जायेगा। यह चुनाव 9 चरणों में होंगे। ईवीएम से चुनाव होंगे। बिहार में दिसंबर में इस बात की संभावना है कि राज्य में मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति के सदस्य और प्रमुख के भी चुनाव हो जाएं। बीजेपी इस बार गांव पर विशेष ध्यान रखकर बिहार में अपने आधार को और भी मजबूत करना चाहती हैं।
स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव में भी फायदा
बीजेपी के सूत्रों की मानें अभी शिक्षक और स्नातक क्षेत्रों के एमएलसी की 8 सीट खाली होने वाली है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की बात करें तो पटना स्नातक सीट से जदयू एमएलसी नीरज कुमार की सीट, दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार, तिरहुत स्नातक सीट से वंशीधर ब्रजवासी और कोसी स्नातक सीट से एन.के. यादव की सीट खाली हो रही है। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक सीट से कांग्रेस नेता मदन मोहन झा, तिरहुत शिक्षक सीट से संजय सिंह और सारण शिक्षक सीट से अफाक अहमद की सीट खाली हो रही है। इन पर नवंबर में चुनाव होने हैं। इस संदर्भ 6 नवंबर तक वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की अंतिम तारीख है। वहीं 30 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।इनमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें शामिल हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इनमें बीजेपी के दो, जदयू के एक, दो निर्दलीय, एक कांग्रेस और एक सीपीआई, एक जनसुराज के पास है। एनडीए इस बार इन 8 सीटों पर कब्जा करने की रणनीति पर काम कर रही है।
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