बिहार :- करवाचौथ क्या है? हिंदू महिलाओं का व्रत है

बिहार :-करवा चौथ क्या है ? करवा चौथ भारत और नेपाल में महिलाओं द्वारा पालन की जाने वाली हिंदू धर्म की एक त्योहार और रीत है। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। भारत के जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब,उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, और बिहार में मनाए जाने वाला पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियां मानती है। या ब्रत सवेरे सूर्योदय के पहले लगभग 4 बजे से आरंभ होकर रात में चंद्रमा दर्शन के उपरांत संपूर्ण होता है। करवा चौथ का व्रत बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ महिलाओं रखती है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए। पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचंद्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवा चौथ में भी संकष्टी गणेश चतुर्दशी के जैसे दिनभर उपवास रहकर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवा चौथ व्रत उत्सव अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मानती है। लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चंद्रोदय की प्रतीक्षा करती है। कार्तिक वृक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी करवा चौथ व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु जाति वर्ण संप्रदाय की हो सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती सुहागिन स्त्रियां अपने पति की आयु स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना करती है वे यह व्रत रखती है। यह ब्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक निरंतर प्रतिवर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने पर के पश्चात इस व्रत को उद्यापन उपसंहार किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियां आज जीवन रखना चाहे और जीवन भर इस व्रत को कर सकती है। इस व्रत के समान और सौभाग्य दायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। आता सुहागन स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत को सतत पालन करती है।

बिहार :- करवाचौथ क्या है? हिंदू महिलाओं का व्रत है
बिहार :- करवाचौथ क्या है? हिंदू महिलाओं का व्रत है