फारस की खाड़ी में नई अनिश्चितता! भारत जहाजों की सुरक्षा के लिए क्या कर रहा, ईरान-अमेरिका में 'बेपटरी' वार्ता से बढ़ा संकट
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता अधर में लटकने की वजह से फारस की खाड़ी में खड़े भारतीय जहाजों का इंतजार और लंबा हो गया है। वैसे भारत अपने जहाजों को सुरक्षित लाने की कोशिशों में लगातार जुटा हुआ है।
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में शांति को लेकर बातचीत फिलहाल फंस चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ एकतरफा सीजफायर बढ़ाने की बात कही है, वहीं तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ इलाके में अपनी मिलिट्री के 5,000 अतिरिक्त जवानों को भी उतारने वाले हैं। वहीं, ईरान ने भी होर्मुज में अपनी मुस्तैदी और बढ़ा दी है। ऐसे में फारस की खाड़ी में 28 फरवरी,2026 के बाद से निकलने के इंतजार में खड़े रह गए भारतीय जहाजों के सामने बहुत बड़ा संकट पैदा हो गया है।
भारत के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल के मुताबिक फारस की खाड़ी में इस समय अपने 14 जहाज मौजूद हैं। इनमें से 13 पर भारतीय झंडे लगे हैं और एक जहाज भारत के स्वामित्व वाला है, लेकिन किसी अन्य देश में रजिस्टर्ड (अन्य देश का झंडा) है
भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर लगातार नजर
अधिकारियों का कहना है कि फारस की खाड़ी में खड़े भारतीय जहाजों की सुरक्षा की स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई है। इसके लिए भारत सरकार लगातार ईरानी सरकार के साथ संपर्क में है। यह समीक्षा शनिवार को दो भारतीय जहाज ों पर ईरानी नेवी की ओर से हुई फारिंग के बाद हुई है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने वाले थे। इससे पहले 10 भारतीय जहाज इस क्षेत्र से गुजर चुके हैं।
'प्रोटोकॉल में सुधार की तत्काल जरूरत नहीं'
बाद में इस घटना को लेकर यह बात सामने आई कि निशाना भारतीय जहाजों पर नहीं था और न ही इसके जरिए किसी क्रू को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई। यह फायरिंग चेतावनी देने के लिए की गई थी। सोमवार को हुई इस समीक्षा के बाद कोई नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी नहीं की गई है और मौजूदा दिशानिर्देशों का ही पालन किया जा रहा है। एक अधिकारी के अनुसार 'हालांकि, हालात बदल रहे हैं, लेकिन प्रोटोकॉल में सुधार की तत्काल जरूरत नहीं है।'
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भारतीय जहाजों को तालमेल के आधार पर निकलने की अनुमति जारी की गई थी, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी की वजह ईरानी जहाजों को निशाना बनाए जाने की वजह से संभवत: सभी देशों पर व्यापक कार्रवाई शुरू हुई।
भारत सरकार के एक अधिकारी
जहाजों को निकालने के लिए ईरान के साथ संपर्क
उसी अधिकारी ने आगे बताया कि, 'खास तौर पर भारतीय झंडे वाले जहाजों को ही निशाना नहीं बनाया गया था।' वहीं उन्होंने जानकारी दी कि'भारत को अमेरिकी नाकेबंदी का किसी तरह से सामना नहीं करना पड़ा है।'
भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरानी अधिकारियों का साथ समन्वय जारी रखेगा।
दूसरे अधिकारी
शनिवार के बाद से कोई भारतीय जहाज नहीं निकला
शनिवार को दो भारतीय जहाजों को चेतावनी में की गई फायरिंग का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद वे होर्मुज स्ट्रेट से वापस फारस की खाड़ी की ओर मुड़ गए थे। इसके बाद से एक भी भारतीय जहाज वहां से नहीं निकल सका है।
फारस की खाड़ी में अभी कैसे हैं हालात
पश्चिम एशिया संकट की वजह से फारस की खाड़ी में लंगर डाले खड़े जहाजों को मैरीटाइम सिक्योरिटी के अतिरिक्त स्तर का पालन करना पड़ रहा है।
- अभी तक खासकर भारतीय जहाजों के लिए कोई खास जोखिम महसूस नहीं की गई है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में संवेदनशील तटीय इलाकों की वजह से ज्यादा चौकन्ना होकर रहना पड़ रहा है।
- इन जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, क्रू की वेवजह मूवमेंट रोकने और बेहतरीन प्रबंधन प्रक्रियाओं के पालन करने को कहा गया है।
- भारतीय नौ सेना क्षेत्र के हालातों पर लगातार नजर रख रही है और किसी भी विपरीत परिस्थिति में उनकी सहायता और एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार है।

