'क्या पढ़ाया- लिखाया .... कितने पेपर होते हैं यह तक नहीं बता सकता वो'PCS ज्योति मौर्य से अफेयर पर पहली बार बोले कमांडेड मनीष दुबे

'क्या पढ़ाया- लिखाया .... कितने पेपर होते हैं यह तक नहीं बता सकता वो'PCS ज्योति मौर्य से अफेयर पर पहली बार बोले कमांडेड मनीष दुबे

PCS अधिकारी ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक मोर्य का विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घरों से लेकर मीडिया और गली -नुक्कड़  तक प्रकरण की खूब चर्चा हो रही हैं। किसी को आलोक का दर्द दिख रहा है तो कोई ज्योति को सही बता रहा है। इस बीच ज्योति से अफेयर को लेकर चर्चाओं में आए जिला होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे ने पहली बार इस प्रकरण पर कुछ कहा है।उन्होंने ऑन कैमरा बयान देने से इन्कार कर दिया तो एक निजी चैनल ने छिपे हुए कैमरे से उनके बयान को रिकॉर्ड कर लिया। इस बयान में मनीष यह कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि जो व्यक्ति (ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक मोर्य) पढ़ाने लिखाने का दावा कर रहा है वो यह तक नहीं बता सकता कि यूपीएससी में कितने पेपर होते हैं। मनीष दुबे इस रिकॉर्डिंग में अपनी परेशानी जाहिर करते भी नजर आए।

मनीष दुबे ने कहा, ' उसे यह नहीं पता होगा कि कितने पेपर होते हैं। पढ़ाया -लिखाया का मतलब बचपन से पढ़ाया -लिखाया। हम जहां बैठे हैं वहां कोई बना सकता है क्या। जो कहता फिर रहा है। पढ़ाया -लिखाया वो नहीं बता सकता कि यूपीएससी मेन्स में कितने पेपर होते हैं, आब्शनल में कितने होते हैं।वो यह नहीं बता पाए।'

यूपीएसी करना गुनाह हो गया ?

होमर्गाड कमांडेंट मनीष दुबे ने कहा कि इस मामले को क्यों इतना बढ़ा चढ़ा दिया गया। मैं नहीं कुछ जानता ना ही कुछ बता सकता हूं यही यदि नार्मल स्कूल टीचर या कर्लक होते तो कोई खबर नहीं होती। हमारा यहां बैठना लग रहा है कि गुनाह हो गया।हम लोग ने यूपीएससी की तैयारी की वो बड़ा गुनाह का काम किया।

साफ्टवेयर इंजिनियर था... कहां आकर फस गया : मनीष ने कहा , 'मै एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था प्राइवेट सेक्टर में था। अब ये लग रहा है। कि फालतू में मैं यहां आकर फस गया। अच्छा खासा मैं 2016मे  जेआरएफ हुआ। पीएचडी के लिए अभी भी प्रोफेसर बुलाते हैं। मेरा मन भी पीएचडी करने का। मैं अप्लाई  करने भी जा रहा हूं। मुझे लगता है कि यहां आकर फस गया। इससे अच्छा मैं दूर रहता सीधी-साधी मीडियाकर फैमिली से बिलांग करता हूं पिताजी मेरे.....इन सभी चीजों को कभी मेरे घर में .....।

पहले ज्योति या हमसे पूछ लेते: मनीष ने आलोक मोर्य का नाम ना लेते हुए कहा कि जब ये स्टार्टिंग में आया था तभी हम लोगों से पूछ लिया जाना चाहिए था उन्होंने कहा , 'ज्योति से पूछ लिया जाता.... या मुझसे पूछ लिया जाता। ऐसा नहीं है कि मैंने बात नहीं की। ' हालांकि उन्होंने फिर यह भी जोड़ा, 'हम ऑन कैमरा ये सब नहीं बोल सकते  ये हमारी मजबूरी है ये हमारे कंडक्ट रुल में आता है एक गजटेड आफिसर इस तरह से नहीं बोल सकता क्योंकि मैं एक जिम्मेदार पद पर हूं नॉन गजटेड कर्मचारी बोल लेगा उसको कुछ नहीं होगा।