स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को योग के बारे में बताया, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव का Exclusive इंटरव्यू

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि विदेशी आक्रमणों के दौरान हमारी योग और आयुर्वेद जैसी परंपराओं को जानबूझकर खत्म करने की कोशिश की गई। दुखद है कि आजादी के बाद भी हमारी सरकारों ने योग को उचित सम्मान और बढ़ावा नहीं दिया ।

स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को योग के बारे में बताया, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव का Exclusive इंटरव्यू

राजेश मिश्र, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 2015 में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। इस बार की थीम 'हेल्दी एजिंग' है। इसका मकसद युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को स्वस्थ रखना है। इस साल का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता में होगा। इस बारे में केंद्रीय आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव से एनबीटी ने बातचीत की। पेश है मुख्य अंश।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम के लिए कोलकाता को ही क्यों चुना?



कोलकाता से ही स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को योग के बारे में बताया था। लेकिन, वहां की पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे दबाकर रखा। इसीलिए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हम कोलकाता में मुख्य कार्यक्रम कर रहे हैं। हमने स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, रवींद्रनाथ टैगोर, अरबिंदो और बंकिम चंद्र जैसी बंगाल की पांच बड़ी हस्तियों के नाम पर अलग-अलग ब्लॉक बनाए हैं। हमारा लक्ष्य है कि कोलकाता की हर गली और सड़क पर लोग योग करते दिखें।

'योग फॉर हेल्दी एजिंग' थीम ही क्यों?

यह थीम आज की सबसे बड़ी जरूरत है आज दुनिया भर में लोग पहले से ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं। लेकिन, असल बात है कि बुढ़ापे के ये साल सेहतमंद रहने के साथ सक्रिय और खुशहाल तरीके से बीतने चाहिए। योग शरीर को मजबूत बनाने और मन को शांति देने का तरीका है।


योग दिवस के लिए क्या तैयारियां है?

मुख्य कार्यक्रम कोलकाता में रेड रोड पर होगा। इसकी अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। मुख्य कार्यक्रम के साथ ही आयुष मंत्रालय की तरफ से लाल किला, हर की पौड़ी, कोणार्क सूर्य मंदिर सहित देश के 12 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर योग का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय देश की 100 ऐतिहासिक जगहों पर खास योग कार्यक्रम आयोजित करेगा। कार्यक्रम 19 जून से शुरू हो गए हैं। पहले दिन दौड़ से ध्यान' कार्यक्रम हुआ। आज 'वंदे योगम' और 'पश्चिम बंगाल दिवस' के जरिये योग व देशभक्ति का संगम दिखेगा। विदेश में भारतीय दूतावास के जरिये दुनिया भर की करीब 2,500 जगहों पर योग दिवस मनाया जाएगा।


योग का इतिहास सदियों पुराना है। क्या इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में देरी हुई?

हां, योग का इतिहास 5,000 बरसों से भी ज्यादा पुराना है। लेकिन, इतिहास गवाह है कि विदेशी आक्रमणों के दौरान हमारी योग और आयुर्वेद जैसी परंपराओं को जानबूझकर खत्म करने की कोशिश की गई। अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसा हुआ। दुखद्
है कि आजादी के बाद भी हमारी सरकारों ने योग को उचित सम्मान और बढ़ावा नहीं दिया।

आप ऐसा क्यों कह रहे है?

शायद पहले की सरकारों को डर था कि अगर योग कहेंगे तो ऋषि- मुनियों की बातें होंगी। ओम का उच्चारण होगा, तो इससे कहीं उनका वोट बैंक न नाराज हो जाए । पश्चिम बंगाल में भी यही हाल था। पहले 35 साल कम्युनिस्टों का राज रहा और फिर ममता बनर्जी की सरकार आई, उन्होंने योग को आगे नहीं बढ़ने दिया।


इसे आगे बढ़ाने में मौजूदा सरकार की क्या भूमिका रही?

पीएम मोदी की पहल पर ही 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने योग दिवस के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। आज यह भारतीय परंपरा से निकलकर सेहत का वैश्विक आंदोलन बन गया है। 14 जून को हुए लाइव योग सेशन में 4 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लेकर गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाया। हमने इसे एक दिन का काम नहीं माना है, 'योग-365' शुरू किया है।

युवाओं को योग से जोड़ने के लिए क्या कर रहे है?

हमने युवाओं के लिए छोटे-छोटे पैकेज बनाए हैं। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी 10 ऐसी बीमारियों की पहचान की है, जो आजकल तेजी से बढ़ रही हैं। 10-20 मिनट के छोटे-छोटे पैकेज के जरिये यह बताते हैं कि किस बीमारी में कौन-सा योगाभ्यास करना चाहिए। इसके अलावा, योग अनप्लग्ड वेबसाइट भी है। नई शिक्षा नीति में योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। अब योग एशियन गेम्स में शामिल हो चुका है और हम इसे ओलिंपिक्स तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके लिए क्या इकॉनमिक मॉडल भी है?

योग रोजगार के बड़े द्वार खोल रहा है। विदेश में भारतीय योग प्रशिक्षकों की काफी मांग है। देश के हर स्कूल में योग टीचर की जरूरत होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि जब लोग स्वस्थ रहेंगे, तभी देश तरक्की करेगा।