मकान तोड़ने पहुंचा प्रशासन, फूट-फूट कर रोने लगे बूढ़े पति-पत्नी, गांववाले भी भावुक, फिर अफसरों ने जो किया
मध्य प्रदेश में सागर-कानपुर नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है. सागर के बंडा के पास स्थित क्वायला गांव में मनोहर लाल का मकान है, जिसमें वह 50 सालों से अधिक समय से रह रहे हैं.
यह मकान सड़क की जद में आ रहा है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी इसे हटाना चाहती है. लेकिन, इस परिवार को अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया.
ऐसे में जब प्रशासन के लोग मकान तोड़ने गए तो ऐसी घटना घटी जिसने सबको भावुक कर दिया. प्रशासन के आगे नतमस्तक बेसहारा लाचार पति-पत्नी बिलख-बिलख कर रोते नजर आए. उनकी हिम्मत इतनी टूट गई कि गांव वालों को चलने के लिए सहारा देना पड़ा. एक समय ऐसा भी हुआ जब मनोहर रोते-रोते अचेत हो गए. इसके बाद प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए और उन्होंने कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया.
अचानक पहुंचे इतने अफसर, पुलिस
मुआवजा के लिए मनोहर लाल के द्वारा कोर्ट में याचिका भी लगाई गई, जिसका मामला विचाराधीन है. लेकिन हाईवे के कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर इस मकान को तोड़ने लाव लश्कर लेकर पहुंच गए थे. इसमें 12 पटवारी, 15 कोटवार, एक तहसीलदार, थाना पुलिस बल और NHAI अथॉरिटी के जिम्मेदार शामिल थे. हालांकि, बुजुर्ग दंपति की हालात को देखते हुए गांव के जिम्मेदार आगे आए. उन्होंने तहसीलदार से बात की इसके बाद मकान न तोड़ने को लेकर सहमति बनी. कहा, कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाएगा.
मालिक ने कहा, पहले मुआवजा
मकान मालिक मनोहर लाल का कहना है कि दशकों से उनका परिवार यहां पर निवास कर रहा है. गांव में सभी लोगों को मुआवजा दिया गया है, लेकिन उनको कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए पहले मुआवजा दिया जाए, तब हमारा घर तोड़ा जाए. नहीं तो हम लोग कहां जाएंगे, क्या करेंगे?
मुआवजा मिलना तय
बंडा तहसीलदार महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अभी भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है. यहां कुछ मकान बचे हैं, जिनको हटाने के लिए आज आए थे, लेकिन यह लोग मना कर रहे हैं. इसलिए अभी समय दिया गया है. मामला कोर्ट में चल रहा है. मुआवजा का मिलना भी तय है.

