डॉ. महादेवी घुगरे चाबुकस्वार को नई दिल्ली के Bharat Mandapam में प्रतिष्ठित 'देश रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया गया

भुज / कच्छ:

कच्छ और पूरे देश के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है। नई दिल्ली के भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में आयोजित भव्य समारोह में माननीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री रघुराज सिंह जी ने सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में आजीवन समर्पण के लिए डॉ. महादेवी घुगरे चाबुकस्वर को प्रतिष्ठित ‘देश रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया।

डॉ. महादेवी घुगरे चाबुकस्वर वसुधैव कुटुंबकम ट्रस्ट की संस्थापक, निदेशक एवं सचिव हैं। वे एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और उद्यमी हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन बाल विकास, बाल कल्याण, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और समावेशी सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित किया है।

अपने दूरदर्शी नेतृत्व में वसुधैव कुटुंबकम ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा के प्रसार, महिलाओं के कौशल प्रशिक्षण तथा जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण हेतु अनेक प्रभावशाली पहलें सफलतापूर्वक लागू की हैं। उनके कार्यों से महाराष्ट्र, गुजरात और विशेष रूप से कच्छ क्षेत्र में हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

पुरस्कार प्रदान करते हुए माननीय मंत्री ने डॉ. चाबुकस्वर की निस्वार्थ सेवा, अथक परिश्रम और समाज के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का समर्पित सामाजिक कार्य एक प्रगतिशील, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देश रत्न पुरस्कार डॉ. महादेवी घुगरे चाबुकस्वर की सेवा, करुणा और नेतृत्व से परिपूर्ण यात्रा की सशक्त पहचान है। उनका कार्य न केवल वर्तमान पीढ़ी को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।

इस अवसर पर कच्छ सहित देशभर के सामाजिक संगठनों, नागरिकों और शुभचिंतकों ने उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए बधाई दी और सामाजिक परिवर्तन के उनके मिशन में निरंतर सफलता की कामना की।

सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. चाबुकस्वर ने कहा—

“यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं है। यह उन हर हाथों का है जो काम करते रहे, उन हर आँखों का है जो पढ़ना चाहती थीं और उन हर सपनों का है जिन्हें सिर्फ एक अवसर चाहिए था।”

उन्होंने कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने केवल सहायता नहीं की, बल्कि लोगों के साथ चलना सीखा; एक शिक्षक के रूप में केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि समर्थ बनाया; और एक उद्यमी के रूप में उन्होंने माना कि रोज़गार केवल आय नहीं, बल्कि सम्मान भी देता है।

उन्होंने कच्छ के स्थानीय उद्यमों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए खावड़ा स्वीट्स एवं फरसान के उद्यमी दयाराम खिलजी दवाड़ा को देश रत्न सम्मान दिलाने में योगदान को अपने लिए गर्व का विषय बताया।

अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने कहा—

“जब महिला, शिक्षा और स्वाभिमान एक साथ आते हैं, तो केवल जीवन नहीं—पूरी पीढ़ी बदलती है। यह सम्मान एक पड़ाव है, काम अभी बाकी है।”