उन्नाव : साबित न हो सका दुष्कर्म का आरोप, सरकारी आर्थिक सहायता लौटाने का आदेश।
Unnao Uttar Pradesh
उन्नाव। औरास थानाक्षेत्र में तीन साल पहले दर्ज हुई दुष्कर्म की घटना में आरोप साबित नहीं हो पाया। न्यायालय ने आरोपी को निर्दोष पाते हुए उसे दोषमुक्त किया है। वहीं तथाकथित पीड़िता को मिली सरकारी आर्थिक सहायता लौटाने का भी आदेश दिया है।
औरास थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता ने चार अगस्त 2021 को थानाक्षेत्र के अदौरा गांव निवासी ओमप्रकाश पर छेड़छाड़ और दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि धान की रोपाई करने के दौरान युवक उसे यूकेलिप्टस के पेड़ो के बीच खींच ले गया था। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया था। विवेचना बांगरमऊ सीओ आशुतोष सिंह ने की थी और आरोपी को दोषी मानते हुए 17 सितंबर 2021 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। शुक्रवार को मुकदमें में अंतिम सुनवाई। अभियोजन पक्ष से अधिवक्ता मनोज कुमार पांडेय की दलील के साथ पीड़िता और अन्य गवाहों के बयानों को सुनने के बाद न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो की न्यायाधीश अल्पना शुक्ला ने आरोपी को निर्दोष करार दिया। वादिनी को निर्देश दिए कि शासन से मिली सरकारी सहायता भी वह एक महीने के अंदर लौटाएगी।
दुष्कर्म की घटना में आरोपी को 10 साल की सजा, 30 हजार जुर्माना
-फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई अंतिम सुनवाई, न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
उन्नाव। छह साल पहले हुई दुष्कर्म की घटना में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दस साल की सजा और 30 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
बांगरमऊ कोतवाली के एक गांव निवासी युवक ने 20 अगस्त 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने सफीपुर के उनवा गांव निवासी कामिल पर बेटी को प्रेम-प्रसंग में फंसाने का आरोप लगाया था। आरोप था कि विवाद खत्म करने के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान ने दोनों की शादी करा देने की बात कहकर सुलह करा दी थी। लेकिन बाद में आरोपी और उसके पिता ने पीड़िता के पिता को जान से मारने की धमकी देते रहे। बेटी को शादी का झांसा देकर उसके साथ कामिल ने दुष्कर्म किया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विवेचना कमलेश्वर प्रसाद ने की थी। पांच नवंबर 2018 को युवक के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया था। फास्ट्र ट्रैक कोर्ट में शुक्रवार को मामले में अंतिम सुनवाई हुई। जिसमें अभियोजन पक्ष से अभियोजक यशवंत की कठिन पैरवी और दलीलों के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने 10 साल के कारावास के साथ 30 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।

