अमृत सरोवर तालाब में दिन दहाड़े हो रहा प्रतिबंधित जेसीबी मशीन का प्रयोग।

मौदहा हमीरपुर। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में मनरेगा योजना के तहत कराए जा विकास कार्यों में प्रतिबंधित जेसीबी मशीनों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। जिसे रोकने में स्थानीय व जिलास्तरीय अधिकारी नाकाम साबित हो रहे हैं और ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की मिलीभगत से सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा अपनी अपनी जेबें भरी जा रही हैं।मौदहा क्षेत्र के गांव सायर में नवनिर्मित अमृत सरोवर तालाब में मजदूरों की जगह धड़ल्ले से दिन दहाड़े प्रतिबंधित जेसीबी मशीन का प्रयोग कर मजदूरों के पेट लात मारी जा रही है जिसको लेकर स्थानीय अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद भी जिम्मेदारों ने चुप्पी साधी हुई है, जिससे सभी स्थानीय जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है और अगर इसी तरह अधिकारियों की मनमानी चलती रही तो फिर स्थानीय मजदूर पलायन करने को मजबूर होने लगेगा। आपको बता दें कि बुंदेलखंड का अधिकांश तबका प्रदेश में लंबे समय से अन्य प्रांतों में मजदूरी करने को मजबूर रहा है लेकिन योगी सरकार में बुंदेलखंड के अधिकांश पलायन करने वाले लोगों में कमी आई थी क्योंकि गांव में ही लोगों को रोजगार मिलना शुरू हो गए थे लेकिन भ्रष्टाचारी अधिकारियों के चलते एक बार फिर स्थानीय लोगों को पलायन करने को मजबूर किया जा है। हालांकि सायर गांव में बन रहे अमृत सरोवर तालाब में जेसीबी मशीन से खुदाई के बारे में जब बात कि गई तो विकास खंड अधिकारी ने बताया कि सायर गांव में कोई अमृत सरोवर तालाब का स्टीमेट ही नहीं है,उधर ग्राम पंचायत अधिकारी गिरीशचंद्र ने बताया अमृत सरोवर तालाब में अगर जेसीबी चलाई जा रही है तो प्रधान से बात कर लीजिए। फिलहाल इस पूरे मसले के 2 दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

अमृत सरोवर तालाब में दिन दहाड़े हो रहा प्रतिबंधित जेसीबी मशीन का प्रयोग।