महंगाई से जूझता पाकिस्तान, जेब खाली होते ही भारत की आई याद, मुनीर की चाल क्या है?
पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम और महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है, जिसके बाद सड़कों पर पब्लिक का गुस्सा देखने को मिल रहा है. पाकिस्तान पब्लिक के गुस्से से बचने के लिए एक नई रणनीति आर्मी चीफ असीम मुनीर के नेतृत्व में बना रहा है.जनता का ध्यान शहबाज सरकार से हटाने के लिए अब एक नया 'एंटी-इंडिया ब्लूप्रिंट' तैयार किया जा रहा है. देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. नौशाहरो फिरोज जैसे शहरों में बंद का आह्वान किया गया, लोग सड़कों पर उतरकर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. जनता का साफ कहना है कि महंगाई अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है.
भारत विरोध के सुर हो रहे मजबूत
ऐसे में यह ब्लूप्रिंट सामने आया है, जिसे सेना प्रमुख असीम मुनीर से जोड़ा जा रहा है. इसके तहत कथित तौर पर राजनीतिक नेताओं और सरकार समर्थक आवाजों को भारत और कश्मीर के मुद्दे को ज्यादा आक्रामक तरीके से उठाने के लिए कहा गया है. यानी अंदर की आग से ध्यान हटाकर बाहर दुश्मन दिखाने की कोशिश की जा रही है. इसका एक नमूना देखने को मिला है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार को आक्रामक बयान देते हुए कहा कि अगर भारत ने कोई भी कदम उठाया, तो जवाब 'तेज, संतुलित और निर्णायक' होगा. उन्होंने यहां तक कहा कि भारत अपने ही जेट के मलबे में दब जाएगा. हालांकि पाकिस्तान में पब्लिक के विरोध को देखते हुए पेट्रोल पर 80 रुपये की कटौती की गई है.
वहीं राणा सनाउल्लाह ने बढ़ती महंगाई को सही ठहराने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पाकिस्तान की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक हालात की वजह से ऐसा हो रहा है. सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी मोर्चा संभाला और दावा किया कि पाकिस्तान पर अभी भी अमेरिका और ईरान जैसे देशों का भरोसा बना हुआ है. सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि कुछ मीडिया और रणनीतिक विश्लेषक भी इसी लाइन को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं. ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि भारत दबाव में है. पाकिस्तानी अवाम को बरगलाने के लिए भारतीय नेताओं के चुनिंदा बयान और वीडियो क्लिप्स को गलत तरीके से दिखाकर सहारा लिया जा रहा है.
क्या पाकिस्तान की यह नई रणनीति है?
विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई नई रणनीति नहीं है. जब भी देश के अंदर हालात बिगड़ते हैं, तब राष्ट्रीय सुरक्षा और बाहरी खतरे का मुद्दा उछालकर लोगों को एकजुट करने की कोशिश की जाती है. इस बार भी तस्वीर कुछ ऐसी ही बनती दिख रही है. विरोध प्रदर्शनों और सरकार की आलोचना को अब इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे यह देश के खिलाफ काम कर सकता है.

