लोकेंद्र गुर्जर ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल करके जबलपुर हाईकोर्ट मे न्यून्ट्रल बैच गठित करने क़ी मांग क़ी थी

लोकेंद्र गुर्जर ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल करके जबलपुर हाईकोर्ट मे न्यून्ट्रल बैच गठित करने क़ी मांग क़ी थी

????प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष बैच क़ी मांग क़ी याचिका पर भड़का सुप्रीम कोर्ट ने किया भारी जुर्माना !

????हाईकोर्ट जबलपुर मे ओबीसी प्रकरणों की निष्पक्ष बैच क़ी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट मे दायर याचिका क़ी सुनवाई से इंकार करते है लगाया भारी जुर्माना !

????लोकेंद्र गुर्जर ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल करके जबलपुर हाईकोर्ट मे न्यून्ट्रल बैच गठित करने क़ी मांग क़ी थी !

????याचिका कर्ता ने सुप्रीम कोर्ट मे माफ़ी मांगने से इंकार करते हुए विधि का प्रश्न निराकृत करने दिया बल जो भी जुर्माना लगाना है लगा दो लेकिन याचिका मे उठाए गए मुद्दे को कर दो निराकृत !

????सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ऋषि केश राय एवं जस्टिस पंकज मित्तल ने याचिका निराकृत करने से इंकार करते हुए लगाई हेवी काष्ट !

????अधिवक्ता क़ी बहस आरम्भ होने के पूर्व ही सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाने की दी चेतावनी ! 

दिलीप दुगारिया...✍️

जबलपुर | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर मे ओबीसी आरक्षण के चल रहे लगभग 80 प्रकरणनो की सुनवाई हेतु न्यून्ट्रल बैच गठित करने का *लोकेंद्र गुर्जर* ने आवेदन दाखिल किया था जिसे हाईकोर्ट ने दिनांक 20/3/2023 को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया था क़ी बैच के किसी सदस्य जज पर व्यक्तिगत आरोप नहीं है ! उक्त दाखिल आवेदन मे मांग क़ी गई थी क़ी obc के 27% आरक्षण को हाईकोर्ट मे चुनौती अनारक्षित वर्ग द्वारा दी गई है जिसकी सुनवाई प्राकृतिक न्याय सिद्धांतो को दृष्टिगत रखते हुए बैच के किसी सदस्य जज को सामान्य एवं obc वर्ग का नहीं होना चाहिए ! हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 20/3/2023 के विरूध सुप्रीम कोर्ट मे एस एल पी (c) 9682/2023 दाखिल क़ी गई जिसकी सुनवाई आज दिनांक 17/7/2023 को कोर्ट रूम न.9 मे सीरियल क्रमांक 24 पर जस्टिस ऋषिकेश राय एवं जस्टिस पंकज मित्तल के समक्ष जैसे ही केस काल हुआ कोर्ट ने कहा आप उक्त याचिका को बापिस ले अन्यथा भारी जुर्माने के साथ ख़ारिज कर दी जाऐगी तब याचिका कर्ता के अधिवक्ता उदय कुमार ने कहा माईलार्ड आपको जितना भी जुर्माना लगाना है आप स्वंत्रत है लेकिन मुझे बहस करने दीजिए क्युकि इस याचिका मे मध्य प्रदेश क़ी आधे से अधिक आवादी के हित अधिकारों का मामाला है तथा याचिका मे उठाए गए मुद्दों को जन हित मे निराकृत किया जाना आवश्यक है ! सुप्रीम कोर्ट उक्त बात सुनाकर और भड़क गई तथा 15 हजार से बढ़ते बढ़ते दो लाख तथा पांच लाख रूपए तक क़ी बात कहकर याचिका ख़ारिज करने क़ी बात कहकर याचिका कर्ता के अधिवक्ता को नहीं सुना गया ! सुनवाई के दौरान AOR वरूण कुमार चौपड़ा ने अपना वाकालतनामा वापिस ले लिया तब सुप्रीम कोर्ट ने उक्त याचिका लगाए जुर्माने क़ी बसूली हेतु आगामी तारीख नियत कर दी गई है ! ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ता उदय कुमार का कहना है क़ी उक्त आदेश के विरूध रिव्यू तथा क्यूरेटिव पीटिशन दाखिल क़ी जाऐगी !