मुख्यमंत्री की घोषणाओं को केविनेट ने लगाई मोहर,मुख्यमंत्री शिवराज चौहान अगले सप्ताह में मीडिया सेंटर का भुमि पूजन करेंगे

मुख्यमंत्री की घोषणाओं को केविनेट ने लगाई मोहर,मुख्यमंत्री शिवराज चौहान अगले सप्ताह में मीडिया सेंटर का  भुमि पूजन करेंगे

भोपाल ।

हर कार्य को करने की एक प्रक्रिया होती है और प्रक्रिया के बाद ही धरातल पर आता है।इसी प्रक्रिया के साथ वित्त विभाग की मंजूरी के बाद ही पत्रकार सम्मान निधि 10000 से बढ़कर 20000 करने को कैबिनेट ने स्वीकृति दी। पत्रकारों को स्वास्थ्य के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि 20000 से 40000 को भी मिली स्वीकृति , मुख्यमंत्री शिवराज चौहान चौहान ने पत्रकारों के लिए जो सुरक्षा कानून बनाने के लिए समिति गठित की है उनमें वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव को नामित किया गया है। यह समिति दो माह के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और हो सकता है कि आचार संहिता लागू होने से पहले पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो।

पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए बहुत पहले काफी कवायद हो गई थी कुछ सुधार के साथ लागू किया जा सकता है।

मेरा मानना है कि पत्रकार सुरक्षा कानून में पत्रकार पर सबसे पहले गृह मंत्रालय के आदेश 1986 2005 और 6जनवरी 2010 के अनुसार धारा 154 के तहत मामला दर्ज हो बह भी थाना प्रभारी के द्वारा उससे छोटे कर्मचारी द्वारा नहीं।

पत्रकार पर प्रकरण दर्ज कराने वाले के वयान लिए जायें की उसका काम क्या है उस काम की जांच होनी चाहिए।

पत्रकार की शिकायत अधिकारी या अवैध कार्य करने वाले ही करते हैं आम नागरिक नहीं करते हैं। मैं यहां यह स्वीकार करने में संकोच नहीं करता हूं कि पत्रकार को स्वयं के साथ ही समाचार पत्र मालिक को अर्थ की आवश्यकता होती है।उस अर्थ की पूर्ति अवैध रूप से काम करने वाले ही करते हैं आम नागरिक नहीं। आपसी सहमति नहीं बनने पर शिकायत दर्ज कराई जाती है। शिकायत दर्ज करने के पूर्व थाना प्रभारी का दायित्व है कि वह जिला जनसंपर्क अधिकारी से पत्रकार की पुष्टि होने के बाद ही कार्यवाही करें। पत्रकार पर दर्ज मामले की जांच सी आई डी से कराना होगा क्योंकि स्थानीय पुलिस शिकायतकर्ता के पक्ष में दवाव में आकर काम करती है।