60 करोड़ भारतीयों पर गंभीर जल संकट, पानी की कमी से अगले 7 सालों में जीडीपी को होगा बड़ा नुकसान

60 करोड़ भारतीयों पर गंभीर जल संकट, पानी की कमी से अगले 7 सालों में जीडीपी को होगा बड़ा नुकसान

60 करोड़ भारतीयों पर गंभीर जल संकट, पानी की कमी से अगले 7 सालों में जीडीपी को होगा बड़ा नुकसान

नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक "बड़ी संख्या में भारतीय जल संकट का सामना करते हैं. अपनी पानी की जरूरतों के लिए भारत की अनियमित मानसून पर निर्भरता इस चुनौती को और बढ़ा रही है.

जलवायु परिवर्तन के दौर में मानसून और उस पर निर्भर जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ा है. इसका सबसे ताजा उदाहरण हैदराबाद में 30 झीलों का सूख जाना है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में शहर की 185 झीलों में से 30 के सूखने की सूचना मिली थी. कुछ झीलों पर अतिक्रमण भी कर लिया गया है. पीसीबी की रिपोर्ट की मानें तो शेखपेट, कुकटपल्ली, मेडचल-मल्काजगिरी और कुतुबुल्लापुर की झीलें सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, लेकिन ये संकट इससे भी कहीं ज्यादा बड़ा है.

पूरे भारत में कई बड़ी नदियों के सूखने के साथ भारत को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है. इस तरह का गंभीर जल संकट कभी नहीं देखा गया था. भारत में दुनिया की आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि देश के पास सिर्फ 4 प्रतिशत जल संसाधन हैं. ये भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा पानी की कमी वाले देशों में से एक बनाता है. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में गर्मियों के आते ही पानी भारत में सोने की तरह कीमती चीज बनती जा रही है.

नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक "बड़ी संख्या में भारतीय जल संकट का सामना करते हैं. अपनी पानी की जरूरतों के लिए भारत की अनियमित मानसून पर निर्भरता इस चुनौती को और बढ़ा रही है. इससे लाखों लोगों का जीवन और आजीविका खतरे में हैं. फिलहाल, 60 करोड़ भारतीयों पर गंभीर जल संकट मंडरा रहा है और पानी की कमी और उस तक पहुंचने में आने वाली मुश्किलों की वजह से हर साल लगभग दो लाख लोगों की मौत हो जाती है. 2030 तक देश की पानी की मांग, उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी होने का अनुमान है, जिससे लाखों लोगों के लिए पानी की गंभीर कमी और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 6 प्रतिशत का नुकसान होने का अनुमान है."

नीति आयोग की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पानी की चुनौतियां और बढ़ी हैं. लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन ने पानी के स्रोतों में बाढ़ या सूखे जैसी स्थिति पैदा कर दी हैं।