पर्वतों की गोद से एक नई शक्ति का उदय: हिमाचल के युवा का घरेलू जिम से गोल्ड मेडल तक का सफर
कुल्लू (हिमाचल प्रदेश):
जब अधिकांश लोग अपने सपनों को साकार करने के लिए शहरों की ओर रुख करते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के एक छोटे से गांव से एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है, जिसने सीमित संसाधनों में रहकर भी एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जो पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। ये कहानी है — कमल कांत राणा की, जिन्हें लोग सोशल मीडिया पर "राणा द वाइपर" के नाम से जानते हैं।
घरेलू जिम से शुरुआत, जुनून से क्रांति
कमल कांत का फिटनेस के प्रति रुझान बचपन से था, लेकिन गांव में न तो कोई जिम था और न ही ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त संसाधन। आर्थिक चुनौतियाँ, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और संसाधनों की कमी के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। मनरेगा में काम करते हुए बची सामग्री — जैसे सीमेंट, रेत, बजरी, पुरानी लोहे की चादरें, लकड़ी की पट्टियाँ और खाली सिलेंडर से उन्होंने हिमाचल का पहला घरेलू देसी जिम खड़ा किया।
सोशल मीडिया से जन-जागरूकता तक
साल 2019 में राणा ने "राणा द वाइपर" नाम से यूट्यूब चैनल की शुरुआत की। नारा था — "नशा मुक्त, फिट हिमाचल"। इस चैनल के माध्यम से वह घरेलू जिम उपकरणों से एक्सरसाइज़ करना सिखाते हैं और हजारों युवाओं को प्रेरित करते हैं। आज उनके चैनल के 1 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।
"मिशन निर्भया" और आत्मरक्षा की मुहिम
कमल कांत केवल बॉडीबिल्डिंग तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के लिए "मिशन निर्भया" अभियान चलाया, जिसके अंतर्गत हजारों लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम किया — वृक्षारोपण और जल संरक्षण को लेकर गाँवों में जागरूकता फैलाई।
सम्मान और मेडल्स की चमक
मिस्टर हिमाचल 2025 में वॉरियर बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल
नॉर्थ इंडिया वॉरियर बॉडीबिल्डिंग 2025 में सिल्वर मेडल
हिमाचल में पहली बार बर्फ़ के बीच 1 घंटे 30 मिनट का मेडिटेशन रिकॉर्ड
स्वदेशी मार्शल आर्ट "कलरीपायट्टू" में निपुणता प्राप्त की

कमल की बात:
> "मुझे आज जो भी मिला, उसका श्रेय मेरे माता-पिता, नाना-दादा, भाई-बहनों, वैदिक ब्रदर्स और उन सभी लोगों को जाता है, जिन्होंने मेरे सफर में मेरा साथ दिया।"
आज के युवाओं के लिए संदेश:
कमल आज सिर्फ एक फिटनेस आइकन नहीं हैं, बल्कि एक युवा आंदोलन के प्रतीक बन चुके हैं। वह लगातार युवाओं को नशे से दूर, फिटनेस के प्रति सजग और समाजसेवा के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
लेखक टिप्पणी:
कमल कांत राणा की यह कहानी न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो पहाड़ों की ऊँचाइयाँ भी आपके कदम चूम सकती है

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