तगड़ी सिक्योरिटी, कदमताल करते मंत्री और खास श्वान... पांच साल से बिना अन्न के जीवित दादा गुरु कौन? विज्ञान के लिए हैं अचंभा

Dada Guru Narmada Parikarma: रेवाखंड के निराहर संत दादा गुरु चौथी बार नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। ओंकारेश्वर से उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत की है। इस दौरान दादा गुरु के साथ सैकड़ों लोगों की भीड़ भी रहती है। पांच साल से वह निराहर हैं। सिर्फ नर्मदा जल का सेवन कर जीवित रहते हैं।

तगड़ी सिक्योरिटी, कदमताल करते मंत्री और खास श्वान... पांच साल से बिना अन्न के जीवित दादा गुरु कौन? विज्ञान के लिए हैं अचंभा

Dada Guru Narmada Parikarma: रेवाखंड के निराहर संत दादा गुरु चौथी बार नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। ओंकारेश्वर से उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत की है। इस दौरान दादा गुरु के साथ सैकड़ों लोगों की भीड़ भी रहती है। पांच साल से वह निराहर हैं। सिर्फ नर्मदा जल का सेवन कर जीवित रहते हैं।

 

विज्ञान के लिए अचंभा माने जाने वाले दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा कल खरगोन जिले में प्रवेश कर गई। इस परिक्रमा का मूल उद्देश्य नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता फैलाना और पर्यावरण की रक्षा करना है। समर्थ भैया जी सरकार या अवधूत समर्थ दादा गुरु नर्मदा नदी के संरक्षण और संवर्धन के लिए जाने जाते हैं। दावा है कि वह पिछले कई सालों से केवल नर्मदा जल पर रहकर अन्न का सेवन किए बिना नर्मदा परिक्रमा करते हैं। उनका मानना है कि प्रकृति और नर्मदा का जल उन्हें आध्यात्मिक और शारीरिक ऊर्जा प्रदान करते हैं । उनका जन्म क्षेत्र मध्य प्रदेश का जबलपुर एरिया बताया जाता है। उनके शिष्यों में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल कैलाश विजयवर्गीय, राजेंद्र शुक्ला और अभिनेता आशुतोष राणा भी शामिल हैं।

पांच साल से निराहर हैं दादा गुरु

दादा गुरु पांच साल से निराहर हैं। उन्होंने इस दौरान अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। इसके बावजूद वह फिट हैं। साथ ही अधिकांश समय वह पदयात्रा ही करते रहते हैं। नर्मदा नदी के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उनके अनुयायी हैं। वह लगातार नर्मदा के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। नर्मदा के किनारों पर पेड़ों को लगाना। गांव के लोगों को जागरूक करना। साथ ही गांव में नर्मदा मां की महिमा को सुनाते हैं।

नर्मदा जल पीकर हैं जीवित


दादा गुरु पांच सालों से सिर्फ नर्मदा जल पीकर जीवित हैं। वह प्रवचन के दौरान एक घूंट भी पानी नहीं पीते हैं। पूरे दिन में सिर्फ नर्मदा नदी का एक लीटर शुद्ध जल पीते हैं। इस जल को पीकर वह पूरी तरह से फिट हैं। नर्मदा जल पर कोई कैसे जीवित रह सकता है। इसे लेकर इन पर शोध भी हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी असाधारण शारीरिक सहनशक्ति पर वैज्ञानिक शोध को भी मंजूरी दी थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर की विशेषज्ञ टीम ने उन पर 22 से 29 मई 2024 के बीच रिसर्च कर 124 पन्नों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में उपवास संबंधी मामूली बदलाव पाया गया। साथ ही दादा गुरु की अद्वितीय प्रतिक्रिया, शारीरिक अनुकूलन और अत्यधिक सहनशक्ति को इसकी वजह बताया गया।

खास श्वान है सिद्धु


वहीं, दादा गुरु चौथी बार नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। वह तीन बार कर चुके हैं। इस दौरान उनके साथ एक कुत्ता सिद्धु भी साथ रहता है। श्वान सिद्धु दादा गुरु के साथ साए की तरह रहता है। वह नर्मदा परिक्रमा के दौरान ही दादा गुरु को मिला था। इस दौरान दादा गुरु से लिपटकर रोने लगा। तभी दादा गुरु ने कहा था कि यह कुत्ता भी नर्मदा परिक्रमा करेगा। तभी से वह साथ है। वह चौथी बार भी दादा गुरु के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रहा है।

लाखों किलोमीटर चल चुके हैं पैदल

दादा गुरु अधिकांश समय पदल ही चलते हैं। उनके शरीर पर वस्त्र भी नहीं होता है। वह सिर्फ लंगोट में होते हैं। बताया जाता है कि पांच लाख किलोमीटर से अधिक वह पैदल चल चुके हैं। नर्मदा परिक्रमा के दौरान भी वह पैदल ही चलेंगे। इसके साथ ही दादा गुरु संबंधी यह मुद्दा कैबिनेट की बैठक में चर्चा हेतु भी आया था। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के मुताबिक रिपोर्ट को देश-विदेश के शोधकर्ताओं और संस्थाओं को भेजा जायेगा ताकि दादा गुरु की प्रकृति आधारित जीवन पर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा सके। वहीं, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि इस शोध को आगे बढ़ना चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि कोई मनुष्य इतने लंबे समय तक बिना भोजन के भी रहकर सामान्य रूप से कैसे कार्य कर सकता है।

मंत्री से संतरी तक होते हैं नतमस्तक

संत दादा गुरु का अपना सम्मान है। यही वजह है कि मंत्री से लेकर संतरी तक दादा गुरु के आगे नतमस्तक होते हैं। प्रदेश के सरकार के कद्दावर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल दादा गुरु के भक्त हैं। वहीं, सीएम मोहन यादव भी दादा गुरु से आशीर्वाद लेने जा चुके हैं। नर्मदा परिक्रमा के दौरान दादा गुरु की सुरक्षा भी तगड़ी रहती है। इस विषय पर पूछे जाने पर दादा गुरु कहते हैं कि व्यक्ति को निस्वार्थ और हृदय से निर्मल होना पड़ता है, तभी यह ऊर्जा मिलती है। अगर आप निष्काम भाव से और शुद्ध आत्मा के साथ रहेंगे तो प्रकृति खुद आपको ऊर्जा प्रदान करेगी। हमारा जीवन प्रकृति पर केंद्रित है, इसलिये प्रकृति के संपर्क में रहकर विभिन्न आपदाओं और संक्रमणों से मुक्ति पाई जा सकती है।

आठ बार नर्मदा परिक्रमा पूरी करने की तैयारी

दादा गुरु अभी चौथी बार नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 तक आठ बार नर्मदा परिक्रमा कर लें।