सीजेआई पर जूता फेंकना निंदनीय, ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या सुझाव... दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी

सीजेआई बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने निंदा की है। साथ ही सुझाव मांगा है, जिससे कि ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।

सीजेआई पर जूता फेंकना निंदनीय, ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या सुझाव... दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी

सीजेआई बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने निंदा की है। साथ ही सुझाव मांगा है, जिससे कि ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।

 

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सीजेआई बीआर गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंके जाने की घटना को 'घृणा' की निंदा की। यह कहते हुए कि इस घटना से न केवल बार के सदस्यों को, बल्कि सभी को ठेस पहुंची है, हाई कोर्ट ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर न हो, इसके लिए उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेदला की बेंच ने कहा कि यह याचिकाकर्ता की चिंताओं को समझती है।

शायद उनसे ज्यादा इन्हीं को ठेस पहुंंची है। यह किसी व्यक्ति विशेष का मामला नहीं। ऐसी घटनाओं को न केवल निंदा की जानी चाहिए, बल्कि उचित कदम भी उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिसमें जूता फेंकने की घटना के वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता तेजस्वरी मोहन ने कहा कि वीडियो अब भी सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है। उन्होंने कोर्ट से यह सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश देने का अनुरोध किया कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएँ होती हैं, तो दोषी व्यक्ति की पहचान छिपाई जाए, ताकि उन्हें प्रचार न मिले। उनका कहना था कि प्रचार न मिलने पर ऐसा करने की सोचने वालों का मनोबल गिरेगा।


केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' (एससीबीए) द्वारा सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका के लंबित होने की जानकारी दी, जिसमें भरी अदालत में सीजेआई पर जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। शर्मा ने कहा कि वे याचिकाकर्ता की चिंताओं से सहमत हैं, लेकिन बेहतर यह होगा कि मोहन लंबित कार्यवाही के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँ।


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अटॉर्नी जनरल (AG) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) से सुझाव मांगे कि चीफ जस्टिस (CJI) पर जूता फेंकने जैसी घटनाओं को दोबारा होने से कैसे रोका जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबीएम पार्दीवाला की बेंच ने 71 वर्षीय एडवोकेट राकेश किशोर के खिलाफ आपराधिक अवमानना (criminal contempt) की कार्रवाई शुरू करने से परहेज़ किया था। इस वकील ने अदालत की कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की ओर है और जूता फेंकने की कोशिश की थी। जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के वकीलों से कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सोचिए। हम अगली तारीख पर विचार करेंगे।