डॉ. सुजीत कुमार साव : शिक्षा और समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान
डॉ. सुजीत कुमार साव : शिक्षा और समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान
डॉ. सुजीत कुमार साव का जीवन प्रेरणा और संघर्ष की अद्भुत मिसाल है। बचपन में, केवल 3-4 वर्ष की आयु में, एक गंभीर दुर्घटना ने उनका दाहिना हाथ और दाहिनी आंख छीन ली। इन चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपने आत्मविश्वास और कठोर दृढ़ इच्छाशक्ति से इन सीमाओं को अपनी ताकत में बदल दिया। आज वे पश्चिम बंगाल सरकार के हुगली जिला के चंदननगर महकमा के गोंदलपाड़ा शास्त्री हिंदी हाई स्कूल (एच.एस.) में इतिहास विभाग के दिव्यांग सहायक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षिक योगदान :
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डॉ. साव ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अमूल्य सेवाएं दी हैं। 12 वर्षों तक उन्होंने जमुड़िया हिंदी हाई स्कूल में इतिहास विभाग के दिव्यांग सहायक शिक्षक के रूप में सेवा करना प्रदान की। 2021 में सरकारी ट्रांसफर के माध्यम से, वे गोंदलपाड़ा शास्त्री हिंदी हाई स्कूल में नियुक्त हुए और यहां भी अपने कार्य में उत्कृष्टता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे वे एक ईमानदार और सिद्धांतवादी इंसान हैं l
कोरोना महामारी के दौरान, जब शिक्षा प्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई, तो उन्होंने समाज के वंचित वर्ग के छात्रों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की। हर शनिवार और रविवार को वे कक्षा 8वीं से 12 वीं तक के छात्रों - छात्राओं को इतिहास की नि:शुल्क कोचिंग देते रहे हैं। उनकी यह पहल उनके शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज को सशक्त बनाने की अनूठी भावना को दर्शाती है।
पर्यावरण संरक्षण में योगदान :
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डॉ. साव पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने "ज्यादा पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ" का नारा दिया और इस अभियान के तहत समाज को प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में कई छात्रों और समाज के लोगों ने पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी की और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।
समाज सेवा और प्रेरणा :
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डॉ. साव शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद समाज सेवा के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर और शारीरिक रूप से अक्षम छात्र - छात्राओं की मदद करते रहते हैं और उन्हें इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि शारिरिक चुनौतियां सफलता की रहा में कोई बाधा नहीं बन सकती l
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादे विकलांगता को कभी भी आड़े आने नहीं देती l कठिन परिस्थितियों के बावजूद , उन्होंने ने अपने सपनों को पूरा किया l घर की आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण वे फूटपाथ के किनारे लैंप पोस्ट की रोशनी में पढ़ाई करते थे l
सम्मान और उपलब्धियां :
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डॉ साव के योगदानों के लिए उन्हें " 2024 स्वर्ण भारत सम्मान " से सम्मानित किया गया , जो " इंडिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्डस " द्वारा प्रदान किया गया l यह सम्मान उनके प्रयासों की सराहना और समाज के प्रति प्रेरणा का प्रतीक है l वे इतिहास विभाग में चंदननगर महकमा के एक मात्र हिंदी माध्यम विद्यालय द्वारा समाज के हर तबके के वर्ग को भी अपने प्रयासों से प्रेरित किया l
विशेष रूप से वे प. ब. के माध्यमिक शिक्षा परिषद पर आधारित हिस्ट्री के एक सहायक रिफ्रेंस बुक भी लिखे हैं , जो बहुत ही सहज और सुलभ भाषा में बाजारों में उपलब्ध हैं l यह बुक माध्यमिक के छात्रों के लिए अति मार्गदर्शक का कार्य करती हैं l
इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान के तीन प्रसिद्ध प्रमुख निकायों ने अभी हाल के ही महीनों में ही उन्हें " ऑनरेरी डॉक्टरेट अवॉर्ड,2024 " से सम्मानित किया है जो राज्य, ग्लोबल, नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर पूरी तरह से परीक्षण एवं जाँच द्वारा दिया जाता हैं l ऐसे यह सम्मान उनके असाधारण कार्यों एवं समाज में उनके योगदान को मान्यता देने का प्रतीक है , जो आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शक का कार्य करेगी l
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